ढाका। बांग्लादेश के शीर्ष हिंदू नेताओं (hindu leaders) में शामिल और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र सेन (Ramesh Chandra Sen) का जेल में निधन हो गया है। वह शेख हसीना सरकार (Sheikh Hasina government) में जल संसाधन मंत्री रह चुके थे। पांच बार सांसद रहे सेन ने वर्ष 2024 में अपना आखिरी चुनाव जीता था। उनकी मौत के बाद जेल में बंद अवामी लीग के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार प्रथम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 9:10 बजे सेन की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने 9:30 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में हुई मौत
जेल सुपरिटेंडेंट के हवाले से बताया गया कि शनिवार सुबह करीब 9:00 बजे रमेश चंद्र सेन बेहोश हो गए थे। इसके तुरंत बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। 86 वर्षीय सेन कई बीमारियों से पीड़ित थे। हालांकि, मामले से जुड़े कुछ लोगों का दावा है कि उन्हें जेल में उचित देखभाल नहीं मिल रही थी।
रमेश चंद्र सेन को अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर हत्या समेत तीन आरोप लगाए गए थे।
अगस्त 2024 में उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिनमें उनके हाथ रस्सी से बंधे दिखाई दे रहे थे। उस समय जब अवामी लीग के कई नेता हमलों के डर से देश छोड़ रहे थे या छिपे हुए थे, सेन ने घर पर ही रहने का फैसला किया था। उनका मानना था कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है।
कौन थे रमेश चंद्र सेन
ठाकुरगांव-1 निर्वाचन क्षेत्र से पांच बार सांसद रहे रमेश चंद्र सेन बांग्लादेश के प्रमुख अल्पसंख्यक हिंदू नेताओं में गिने जाते थे।
उनका जन्म 30 अप्रैल 1940 को ठाकुरगांव जिले के रुहिया यूनियन में हुआ था। वह 2009 से 2014 तक शेख हसीना सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे।
उन्होंने पहली बार 1997 में उपचुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया और इसके बाद 2008, 2014, 2018 और 2024 में सांसद चुने गए।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
रमेश चंद्र सेन की मौत को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इसे हिरासत में मौत बताते हुए सवाल उठाए हैं।
दावों के मुताबिक, हिरासत में बीमार पड़ने के बाद अब तक कम से कम पांच वरिष्ठ अवामी लीग नेताओं की मौत हो चुकी है।
ढाका निवासी प्रदीप चौधरी ने फेसबुक पर लिखा,
“कहा जाएगा कि उनकी मौत बीमारी से हुई, लेकिन नहीं—यह एक और हत्या है। यह उस सिलसिले का हिस्सा है, जो 5 अगस्त 2024 से चल रहा है।”
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