
नई दिल्ली । भारत जब 72 घंटे से भी कम समय में टी20 वर्ल्ड कप(T20 World Cup) में अपने खिताब बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगा, तो सबकी निगाहें सिर्फ टीम संयोजन या प्लेइंग इलेवन(Playing XI) पर नहीं होंगी, बल्कि एक खास जुगलबंदी पर टिकी होंगी मुख्य कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir)और कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav)की जोड़ी। द्विपक्षीय सीरीजों में दबदबा कायम करने वाली भारतीय टीम के सामने अब असली परीक्षा विश्व कप(World Cup) जैसे बड़े मंच पर खुद को दोहराने की है, और इस चुनौती में गंभीर का क्रिकेटिंग दिमाग और सूर्या की मैदान पर मिली आजादी निर्णायक साबित हो सकती है।
राहुल द्रविड़ के सफल कार्यकाल के बाद जब भारतीय टीम ने नए दौर में कदम रखा, तो रोहित शर्मा की एक भावुक इंस्टाग्राम पोस्ट ने कप्तान-कोच के रिश्ते की गहराई को बखूबी बयां किया था। ‘वर्क वाइफ’ वाला जिक्र दरअसल उस भरोसे और तालमेल का प्रतीक था, जो किसी भी सफल टीम की बुनियाद होता है। अब वही कसौटी गंभीर और सूर्या की जोड़ी पर लागू होती है। फर्क बस इतना है कि यह रिश्ता पारंपरिक नहीं, बल्कि आधुनिक टी20 सोच से गढ़ा गया है।
आंकड़े इस साझेदारी की मजबूती की गवाही देते हैं। गंभीर-सूर्या की जोड़ी ने अब तक 39 मैचों में 31 जीत दर्ज की है, यानी करीब 80 प्रतिशत सफलता दर। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में भले ही कप्तान हमेशा ‘बॉस’ रहा हो चाहे वह गांगुली हों, धोनी, कोहली या रोहित लेकिन टी20 क्रिकेट ने कोच की भूमिका को कहीं ज्यादा रणनीतिक और सक्रिय बना दिया है। यही वजह है कि फुटबॉल-मैनेजर स्टाइल की कोचिंग गंभीर जैसे व्यक्तित्व के लिए बिल्कुल मुफीद बैठती है।
गंभीर रणनीति बनाने वाले हैं, योजनाओं को बारीकी से गढ़ने वाले। लेकिन उन योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए जिस निडर, रचनात्मक और आत्मविश्वास से भरे खिलाड़ी की जरूरत होती है, वह सूर्या हैं। पिछले एक साल में कई मौके ऐसे आए हैं, जहां गंभीर ने खाका खींचा और सूर्या ने उसे अपने अनोखे अंदाज में अंजाम तक पहुंचाया। मैदान पर 360 डिग्री शॉट्स, जोखिम लेने की आजादी और विरोधी गेंदबाजों पर लगातार दबाव यह सब सूर्या की कप्तानी की पहचान बन चुका है।
दोनों का इतिहास भी इस रिश्ते को गहराई देता है। कोलकाता नाइट राइडर्स में गंभीर की कप्तानी में ही सूर्यकुमार ने फिनिशर के तौर पर पहचान बनाई थी और ‘स्काई’ नाम भी उसी दौर की देन है। यह भी किसी से छिपा नहीं कि टी20 कप्तानी की दौड़ में सूर्यकुमार को आगे लाने में गंभीर की भूमिका अहम रही। व्यक्तित्व के स्तर पर दोनों बिल्कुल अलग हैं एक दिल्ली के पुराने इलाकों की सख्त सोच से निकला, दूसरा मुंबई की आजाद और बेफिक्र क्रिकेट संस्कृति का प्रतिनिधि। लेकिन मेहनत, आत्मसम्मान और राष्ट्रवाद इन मूल्यों ने दोनों को एक धागे में पिरो दिया है। यही कारण है कि यह जोड़ी सिर्फ रणनीति और प्रदर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी प्रतीक बनती जा रही है।
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