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फागुन में सिमटती गंगा, बिहार में भीषण गर्मी और पानी संकट की दस्तक

February 13, 2026

नई दिल्ली । बिहार (Bihar)में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। फागुन के महीने में ही गंगा का जलस्तर (Ganga water level) घटने लगा है, जो आने वाले दिनों में भीषण गर्मी (extreme heat)और संभावित जल संकट (Water crisis)की ओर संकेत कर रहा है। आमतौर पर वैशाख-जेठ (Vaishakh-Jeth)में गंगा का पानी पीछे हटता है, लेकिन इस वर्ष फरवरी में ही शहरी इलाकों से नदी की धारा काफी दूर चली गई है। भागलपुर के बरारी स्थित इंटकवेल को जिस स्थान से पिछले वर्ष फरवरी में पानी मिलता था, इस बार वहां से करीब सौ फीट आगे अतिरिक्त पाइप लगाकर पानी लेना पड़ रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात सामान्य नहीं हैं।

गर्मी के शुरुआती संकेत केवल नदी के घटते जलस्तर तक सीमित नहीं हैं। मवेशियों में अधिक प्यास लगना और भूख कम होना भी तापमान में असामान्य वृद्धि के संकेत दे रहे हैं। मौसम के जानकारों का मानना है कि यदि मार्च-अप्रैल में वर्षा नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इंटकवेल प्रबंधन ने संभावित संकट को देखते हुए अतिरिक्त पाइप मंगाने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि जलापूर्ति बाधित न हो।

संभावित पानी संकट को लेकर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पीएचईडी भी सतर्क हो गया है। विभाग ने सभी क्षेत्रों से ग्राउंड वाटर लेवल की रिपोर्ट तलब की है। कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार ने जूनियर इंजीनियरों को साप्ताहिक अवलोकन वीकली ऑब्जर्वेशन के निर्देश दिए हैं, ताकि भूजल स्तर में गिरावट की नियमित मॉनिटरिंग की जा सके और समय रहते सरकार से सहायता मांगी जा सके।

इस बीच केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की प्री-मानसून बुलेटिन ने भी चिंता बढ़ा दी है। मई 2025 में जारी होने वाली रिपोर्ट से पहले जनवरी-फरवरी में ग्राउंड सुपरविजन के दौरान भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे शहरों और गांवों में भूजल स्तर में गिरावट की पुष्टि हुई है। सीजीडब्ल्यूबी ने सभी प्रखंडों का जलस्तर रिकॉर्ड किया है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट मई-जून में प्रकाशित होगी। प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि हालात सामान्य से अलग हैं और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।


  • गंगा के सटे जिलों में भूजल स्तर के आंकड़े भी चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। बक्सर में 56138.3 से घटकर 30318.55 हेक्टेयर मीटर, पटना में 98219.10 से 37595.63, लखीसराय में 37503.18 से 26462.36, बेगूसराय में 50675.69 से 15692.38, मुंगेर में 37580.04 से 23849.59 और भागलपुर में 71315.39 से 42472.99 हेक्टेयर मीटर तक गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट आने वाले महीनों में पेयजल संकट की आशंका को और गहरा कर रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण की ठोस पहल नहीं की गई तो स्थिति विकट हो सकती है। फिलहाल प्रशासन निगरानी और तैयारी में जुटा है, लेकिन फागुन में ही सिमटती गंगा साफ संकेत दे रही है कि इस बार गर्मी सामान्य नहीं रहने वाली।

     

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