
नई दिल्ली: इस वक्त इटली भी प्रदर्शनों की आग में जल रहा है. इसकी जद में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी हैं. शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 4,400 करोड़ रुपये की संपत्ति जलाकर राख कर दी. दिलचस्प बात यह है कि प्रदर्शनकारियों में अधिकांश जेन-अल्फा पीढ़ी के युवा हैं, जो शिक्षा के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक रविवार को पुलिस ने 200 लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें अधिकांश की उम्र 16 साल है और ये अभी नाबालिग हैं. इधर, इटली की प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
इटली के प्रधानमंत्री का कहना है कि जो लोग आग लगा रहे हैं, वो देश के हित में नहीं सोच रहे हैं. उन्होंने इन प्रदर्शनकारियों दंगाई के नाम से संबोधित किया है. इटली में स्टूडेंट्स (जिनमें अधिकांश जेन-अल्फा हैं) का कहना है कि यहां की सरकार एजुकेशन के मुकाबले हथियार को ज्यादा तरजीह दे रही है. छात्रों ने नो वेपंस का नारा दिया है. जेन अल्फा का यह विरोध प्रदर्शन ऐसे वक्त में हो रहा है, जब इटली में आम चुनाव होने हैं. इटली में साल 2027 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं.
इटली में 2024 में GDP का करीब 4 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया गया. रकम के लिहाज से यह खर्च लगभग 97 अरब डॉलर (9.21 लाख करोड़ रुपए) था. वहीं, इसी साल इटली ने हथियार खरीदने पर करीब 30 अरब डॉलर (2.8 लाख करोड़) खर्च किए. इटली का कुल रक्षा खर्च 50 अरब डॉलर (4.75 लाख करोड़ रुपए) है. इटली ने अमेरिका और नाटो के दबाव में यह फैसला लिया है.
मेलोनी ने वामपंथियों को जिम्मेदार ठहराया
इधर, इटली की प्रधानमंत्री ने पूरे प्रकरण के लिए वामपंथी नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है. मेलोनी के मुताबिक सभी युवाओं को वामपंथी नेताओं ने भड़काया. इसी कारण यहां पर आगजनी की घटना घटी. उन्होंने कहा कि गुंडों के गिरोहों को बख्शा नहीं जाएगा. इटली के साथ-साथ फ्रांस में भी इसी तरह का विरोध प्रदर्शन हो रहा है. वहां भी रविवार को 1500 से ज्यादा दुकानों में आग लगा दी गई.
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