
नई दिल्ली। बीता साल निवेशकों (Investors) के लिए मिला-जुला रहा। जहां सोने-चांदी (Gold and silver) ने उन्हें रिकॉर्ड बंपर मुनाफा (Record bumper profits) कराया, वहीं घरेलू शेयर बाजारों ने औसत रिटर्न ही दिया। उधर, रुपये के प्रदर्शन ने उन्हें निराश किया। अब नए साल में निवेशकों (Investors) की उम्मीदें एक बार फिर सोने-चांदी पर आकर टिक गई हैं।
चांदी : 170 प्रतिशत की वृद्धि
चांदी की कीमत इस साल एक जनवरी को 90,500 रुपये प्रति किलोग्राम थी, 31 दिसंबर तक नए रिकॉर्ड 000 तक पहुंच गई है। इस तरह चांदी में 1,24,000 रुपये यानी 170 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनियाभर में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं, इसकी आपूर्ति भी घट गई है।
इस वजह से अंतराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया जा रहा है। चांदी में अगले साल भी 15 से 20 प्रतिशत तक की तेजी बने रहने की उम्मीद है। अनुमान है कि साल 2026 में चांदी भारतीय बाजार में तीन लाख का स्तर पार कर सकती है।
सोना : पहली बार 80 फीसदी का रिटर्न
इस साल सोने ने भी मुनाफा देने में 50 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। 31 दिसंबर 2024 को इसके दाम ₹78,950 प्रति 10 ग्राम थे, जो 31 दिसंबर 2025 को ऐतिहासिक उछाल के साथ 1.40 लाख के पार निकल गए हैं। बीते एक साल में सोने के दाम में ₹61,900 हजार रुपये का जोरदार इजाफा हुआ है और यह करीब 80 फीसदी का रिटर्न है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि नए साल में भी सोना सुरक्षित निवेश विकल्प बना रहेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका भाव 5000 डॉलर प्रति औंस के पार निकल सकता है। इससे भारतीय बाजार में इसके दाम 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच सकते हैं।
सेंसेक्स: नौ फीसदी की बढ़त
एक जनवरी को सेंसेक्स 78,507.41 पर बंद हुआ था और 31 दिसंबर को 85,220,60 अंक पर बंद हुआ। साल की शुरुआत में सेंसेक्स में तेजी का रुख शुरू हुआ, लेकिन अप्रैल में अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद दुनियाभर के बाजार धराशायी हो गए। इसका असर घरेलू बाजारों पर दिखा। सेंसेक्स इस साल सेंसेक्स करीब 7000 अंक चढ़ा है और करीब नौ फीसदी का रिटर्न दिया है।
निफ्टी: 10.5 फीसदी का उछाल दर्ज
निफ्टी एक जनवरी, 2025 को 23,742.90 पर बंद हुआ था। इस दौरान निफ्टी में भी 2,484.80 अंकों का उछाल आया और 10.5 प्रतिशत का रिटर्न मिला। आंकड़ों के अनुसार, इससे निवेशकों की संपत्ति में 30 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, नए साल की शुरुआत में यदि अमेरिका से व्यापार समझौता होता है तो बाजार में तेजी का दौर देखने को मिल सकता है।
रुपया : 5 फीसदी लुढ़ककर 91 पार निकला
भारतीय मुद्रा जनवरी में प्रति डॉलर 85 के स्तर से अब तक करीब पांच प्रतिशत कमजोर हो चुकी है और डॉलर के मुकाबले 91 के ऐतिहासिक निचले स्तर को भी पार कर गई है। वर्ष के दौरान रुपये की विनिमय दर यूरो के मुकाबले 19 प्रतिशत से अधिक, ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले लगभग 14 प्रतिशत और जापानी येन के मुकाबले पांच प्रतिशत से अधिक कमजोर हुई है।
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