
इंदौर। छावनी की 66 साल पुरानी अनाज मंडी को शिफ्ट करने की कवायद बीते कुछ वर्षों से चल रही है। मगर इसमें सबसे बड़ी बाधा वन विभाग की जमीन के चलते आ रही थी। अब मोरोद में 200 एकड़ पर आधुनिक मंडी विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि वन विभाग ने एनओसी दे दी है, जिसके चलते मंडी बोर्ड ही विकास कार्य शुरू कर सकेगा। हालांकि पहले प्राधिकरण के माध्यम से मंडी विकसित करवाने की भी योजना तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने तैयार कराई थी और उसके एवज में छावनी अनाज मंडी की 17 एकड़ जमीन दी जाना थी। मगर अब अगर मंडी बोर्ड ही यह काम करेगा तो फिर छावनी की जमीन का उपयोग शहर हित के प्रोजेक्टों में किया जा सकेगा।
बीच शहर में मौजूद छावनी अनाज मंडी के कारण यातायात भी जाम रहता है और पार्किंग सहित अन्य समस्याएं भी हैं, जिसके चलते मोरोद में मंडी को शिफ्ट करने की योजना बनाई गई और 200 एकड़ जमीन प्रशासन ने इसके लिए चिन्हित की। मगर चूंकि यह जमीन वन विभाग के स्वामित्व में है, जिसके चलते मंडी शिफ्टिंग का काम इतने समय से लम्बित पड़ा रहा। मगर अब वन विभाग ने इस जमीन पर अपनी एनओसी दे दी है और शासन इतनी ही जमीन वन विभाग को अन्य कहीं आबंटित कर देगा।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने वन विभाग से एनओसी मिलने की पुष्टि भी की और दूसरी तरफ मंडी आयुक्त कुमार पुरुषोत्तम से पूछने पर उन्होंने भी कहा कि एनओसी तो मिल गई है, मगर अब शासन को ये जमीन मंडी बोर्ड को आवंटित करना होगी। इसके बाद फिर बोर्ड ही यहां पर आधुनिक मंडी विकसित करने का काम शुरू करेगा। वर्तमान में जो छावनी अनाज मंडी की जो 17 एकड़ जमीन है उसके भी दस्तावेजों की प्रशासन जांच करवा रहा है, ताकि यह निश्चित हो सके कि इस जमीन का स्वामित्व किसके पास है और वर्तमान में इसका इस्तेमाल किस तरह से हो सकता है।
प्राधिकरण के माध्यम से भी विकसित कराने का रखा है विकल्प
पूर्व में मोरोद की नई मंडी को विकसित करवाने की जिम्मेदारी इंदौर विकास प्राधिकरण को सौंपने का निर्णय भी प्रशासन ने लिया था और उसके बदले छावनी की 17 एकड़ जमीन प्राधिकरण को दी जाती, जो उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करता और नई मंडी को विकसित करने में जो धनराशि खर्च होगी उसकी प्रतिपूर्ति छावनी की जमीन से की जाती। इसके लिए मास्टर प्लान में भू-उपयोग भी बदलवाकर व्यावसायिक करवाने का निर्णय लिया था। मगर अब मंडी बोर्ड भी तैयार है, खुद विकसित करने के लिए। हालांकि अभी भी प्राधिकरण का विकल्प तो मौजूद है ही।
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