नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में पाकिस्तान और मालदीव ने कई अहम समझौते किए हैं। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Maldives, President Mohamed Muizzu) की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, पुलिस प्रशिक्षण, व्यापार, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को अगले दो वर्षों में बढ़ाकर 200 मिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है। भारत इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण सामरिक और आर्थिक भूमिका निभाता है। ऐसे में पाकिस्तान और मालदीव के बीच बढ़ते सहयोग पर भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर रहना स्वाभाविक है। हालांकि, इन समझौतों को सीधे भारत के खिलाफ किसी गठबंधन के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के जरिए सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन समझौतों के तहत सैन्य तैनाती, संयुक्त अभियान या किसी तीसरे देश के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित प्रावधानों की जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। इसलिए इनके सामरिक प्रभाव का आकलन ठोस शर्तों और कार्यान्वयन के आधार पर ही किया जा सकता है।
पाकिस्तान और मालदीव ने सुरक्षा के अलावा सार्वजनिक सेवा और आर्थिक विकास से जुड़े कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इनमें पुलिस प्रशिक्षण, सिविल सेवा प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य पेशेवरों की भर्ती, हवाई संपर्क, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना और मत्स्य पालन का विकास शामिल हैं।
दोनों देशों ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रशिक्षण को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में जानकारी साझा करने तथा तकनीकी सहयोग बढ़ाने को लेकर समझौते किए गए हैं।
इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संस्थागत संपर्क बढ़ाना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को व्यापक बनाना है।
इस्लामाबाद में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बैठक में आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर अगले दो वर्षों में 200 मिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
कृषि उत्पादों और आवश्यक खाद्य पदार्थों के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान और स्टेट ट्रेडिंग ऑर्गनाइजेशन ऑफ मालदीव के बीच भी समझौता किया गया है। इसके जरिए दोनों देशों के बीच वस्तुओं की आपूर्ति और व्यापारिक संपर्क मजबूत करने की योजना है।
मालदीव के लिए खाद्य पदार्थों की नियमित आपूर्ति महत्वपूर्ण है, जबकि पाकिस्तान अपने कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार तलाश सकता है। हालांकि, निर्धारित व्यापार लक्ष्य हासिल करना वास्तविक मांग, परिवहन लागत और दोनों देशों के कारोबारी तंत्र पर निर्भर करेगा।
हिंद महासागर क्षेत्र भारत की समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत के पश्चिमी और दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों के आसपास होने वाली रणनीतिक गतिविधियों पर नई दिल्ली लगातार नजर रखती है। मालदीव की भौगोलिक स्थिति के कारण भारत के साथ उसके संबंधों का क्षेत्रीय सुरक्षा में विशेष महत्व है।
पाकिस्तान के साथ मालदीव के बढ़ते सहयोग को इसी व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ में देखा जा रहा है। समुद्री सुरक्षा, रक्षा संपर्क और तकनीकी सहयोग से संबंधित समझौते भविष्य में दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ा सकते हैं। हालांकि, इन समझौतों से भारत की समुद्री सुरक्षा पर तत्काल या प्रत्यक्ष खतरा पैदा होने का निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त जानकारी सामने नहीं आई है।
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के कार्यकाल में भारत के साथ संबंध भी चर्चा में रहे हैं। उनके शुरुआती कार्यकाल में भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में प्रमुख रहा था। बाद में भारत और मालदीव ने विकास सहयोग तथा द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए।
मालदीव यह कहता रहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान के साथ हालिया समझौतों के वास्तविक प्रभाव का आकलन इस बात से होगा कि उन्हें किस तरह लागू किया जाता है और क्या इनके तहत कोई ठोस सैन्य या परिचालन व्यवस्था बनाई जाती है।
पाकिस्तान और मालदीव के बीच बढ़ते संबंधों को भारत के क्षेत्रीय प्रभाव के संदर्भ में देखा जा सकता है, लेकिन केवल समझौतों के आधार पर यह कहना कि पाकिस्तान भारत को समुद्र में घेरने की योजना बना रहा है, अभी एक अनुमान होगा।
समुद्री सुरक्षा, पुलिस प्रशिक्षण, व्यापार और तकनीकी सहयोग जैसे समझौते सामान्य द्विपक्षीय साझेदारी का हिस्सा भी हो सकते हैं। इनका भारत पर संभावित प्रभाव समझने के लिए समझौतों की विस्तृत शर्तों, उनके क्रियान्वयन और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की वास्तविक प्रकृति पर नजर रखनी होगी।
फिलहाल, मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा ने हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते कूटनीतिक समीकरणों की चर्चा को फिर तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश अपने समझौतों को किस हद तक लागू करते हैं और उनका क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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