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प्रदूषण से शरीर में पहुंच रहे हैवी मेटल्स बढ़ा रहे भूलने की बीमारी का खतरा, एम्स के अध्ययन में खुलासा

February 15, 2026


नई दिल्ली
। बढ़ते प्रदूषण (Pollution) का असर अब केवल फेफड़ों या दिल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे दिमाग की कार्यक्षमता (Brain Function) को प्रभावित कर रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि हवा, पानी और भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश करने वाले हैवी मेटल्स याददाश्त कमजोर करने और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा बढ़ाने से जुड़े हो सकते हैं।

कैसे शरीर तक पहुंच रहे हैं भारी धातु

शोधकर्ताओं के अनुसार प्रदूषित वातावरण, दूषित जल स्रोत और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से लिथियम, एल्युमिनियम, कोबाल्ट सहित कई भारी धातुएं शरीर में प्रवेश कर रही हैं। ये तत्व लंबे समय तक शरीर में जमा होकर मस्तिष्क की कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) पर असर डालते हैं, जिससे सोचने-समझने की क्षमता और स्मरण शक्ति प्रभावित होती है।

60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग पर किया गया अध्ययन

एम्स के बायोफिजिक्स विभाग के वैज्ञानिकों ने विभिन्न विभागों के चिकित्सकों के साथ मिलकर यह अध्ययन किया। इसमें 60 वर्ष से अधिक आयु के 65 प्रतिभागियों तथा सामान्य व्यक्तियों के स्वास्थ्य मानकों की तुलना की गई।
जांच में पाया गया कि जिन लोगों में याददाश्त से जुड़ी समस्याएं थीं, उनके रक्त में कई धातुओं का स्तर सामान्य से अधिक था।



  • खून में पाए गए ये धातु

    अध्ययन के दौरान जिन तत्वों की मात्रा अधिक पाई गई, उनमें शामिल हैं:

    लिथियम

    एल्युमिनियम

    वैनेडियम

    मैंगनीज

    कोबाल्ट

    निकेल

    जिंक

    सिल्वर

    वैज्ञानिकों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में मस्तिष्क इन तत्वों के स्तर को नियंत्रित करता है, लेकिन अत्यधिक संपर्क या लंबे समय तक एक्सपोज़र से संतुलन बिगड़ सकता है, जो संज्ञानात्मक क्षरण (cognitive decline) से जुड़ सकता है।

    प्रदूषण, कृषि और भूजल भी जिम्मेदार

    शोध में औद्योगिकीकरण, रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग और सीवेज प्रदूषण को प्रमुख कारणों में गिना गया है।
    कई क्षेत्रों में भूजल में धातुओं और रासायनिक तत्वों की बढ़ती मात्रा दर्ज की गई है, जो सिंचाई के जरिए फल-सब्जियों और अनाज तक पहुंच रही है। इस तरह ये तत्व भोजन और हवा दोनों माध्यमों से शरीर में प्रवेश कर रहे हैं।

    बड़े स्तर पर आगे और रिसर्च की तैयारी

    शोध दल के अनुसार अब इस विषय पर व्यापक स्तर का अध्ययन प्रस्तावित है, जिसमें अन्य शहरों के अस्पतालों और अधिक आबादी को शामिल किया जाएगा, ताकि प्रदूषण और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य के बीच संबंध को और स्पष्ट रूप से समझा जा सके।

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