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देश के इन हिस्सों में जनवरी से मार्च तक तेज बारिश की संभावना.. IMD ने चेताया

January 02, 2026

नई दिल्ली। इस साल जनवरी से मार्च तक की अवधि में दक्षिण और मध्य भारत (South and Central India) में अच्छी बारिश (Rain) होने की संभावना है, जबकि पंजाब और हरियाणा (Punjab and Haryana) सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।

महापात्रा ने हालांकि बताया कि देश के कुछ हिस्सों में औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान का रबी की फसल पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है। साथ ही मॉनसून की अच्छी बारिश के कारण जलाशय भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर, बिहार और विदर्भ के कुछ हिस्सों में एक से तीन दिन अतिरिक्त ठंड पड़ने की संभावना है, जबकि राजस्थान में कम ठंड पड़ने का अनुमान है।


महापात्रा ने कहा कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में जनवरी में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ प्रायद्वीपीय भारत में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है।

दिसंबर में क्यों रहा सूखे जैसा मौसम
मौसम विभाग ने दिसंबर महीने में लगभग सूखे मौसम का कारण पश्चिमी विक्षोभों की अनुपस्थिति को बताया, जो आमतौर पर देश के उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में बारिश और गरज के साथ बौछारें लाते हैं। महापात्रा ने कहा, ‘पश्चिमी विक्षोभ या तो उत्तर की ओर बढ़ रहे हैं या बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका कारण जलवायु परिवर्तन है।’ उन्होंने कहा कि दिसंबर से मार्च के दौरान कम बर्फबारी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम में अच्छी बारिश के संकेतकों में से एक है।

महापात्रा ने कहा कि वर्तमान में ला नीना की स्थिति बनी हुई है – यानी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह ठंडी हो रही है – और वैश्विक पूर्वानुमान ने मार्च तक ईएनएसओ तटस्थ स्थितियों का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा, ‘जून-जुलाई तक ईएनएसओ की तटस्थ परिस्थितियां हावी रहने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह अच्छी मॉनसूनी बारिश का सूचक है।’ महापात्रा ने कहा कि 2025, 1901 के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष था, जिसमें अखिल भारतीय वार्षिक औसत भूमि सतह वायु तापमान 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

अब तक का सबसे गर्म वर्ष 2024 था, जब पूरे भारत में तापमान दीर्घकालिक औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक था। आईएमडी के महानिदेशक ने कहा कि शीतकालीन (जनवरी-फरवरी) और मॉनसून-पूर्व (मार्च-मई) ऋतुओं के दौरान अखिल भारतीय मौसमी औसत तापमान दीर्घकालिक औसत से अधिक रहा, जिसमें क्रमशः 1.17 डिग्री सेल्सियस और 0.29 डिग्री सेल्सियस की विसंगति देखी गई।

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