
इंदौर. देश (India) के सबसे स्वच्छ शहर (Clean city) इंदौर (Indore) के भागीरथपुरा (Bhagirathpura) इलाके में दूषित पानी के कारण हो रही मौतों और बीमारी के तांडव पर मध्य प्रदेश (MP) हाई कोर्ट (High Court ) की इंदौर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिवक्ता रितेश इनानी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के आदेश दिए हैं।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश:
नि:शुल्क इलाज का आदेश:
हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि दूषित पानी से बीमार हुए सभी व्यक्तियों का इलाज सरकारी खर्च पर किया जाएगा। निजी या सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के उपचार का सारा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
शुद्ध पेयजल की आपूर्ति:
नगर निगम को आदेश दिया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों (विशेषकर भागीरथपुरा) में शुद्ध और स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। निगम ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में 20 टैंकरों के जरिए पानी भेजा जा रहा है।
स्टेटस रिपोर्ट तलब:
अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम से अगली सुनवाई तक एक विस्तृत ‘स्टेटस रिपोर्ट’ मांगी है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि कितने लोग बीमार हैं, कितने अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें क्या चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता रितेश इनानी (जो स्वयं कोर्ट में उपस्थित थे) ने दलील दी कि नगर निगम की लापरवाही के कारण इंदौर के कई इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। भागीरथपुरा में स्थिति बेहद गंभीर है, जहाँ दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग संक्रमण की चपेट में हैं। उन्होंने मांग की कि दोषियों पर कार्रवाई हो और पीड़ितों को तत्काल बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें।
सरकार और निगम का पक्ष
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार अस्पतालों को पहले ही अलर्ट कर दिया गया है। निगम की ओर से पेश वकीलों ने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में साफ पानी की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
अगली सुनवाई:
शीतकालीन अवकाश के दौरान हुई इस विशेष सुनवाई के बाद, माननीय न्यायालय ने मामले की अगली तारीख 2 जनवरी, 2026 तय की है।
नोट: यह याचिका W.P. No. 50628/2025 के रूप में दर्ज है।
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