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हैदराबादी बिरयानी से खुला टैक्स चोरी का जाल, देशभर में 70,000 करोड़ की हेराफेरी का खुलासा

February 20, 2026

नई दिल्ली। एक सामान्य खाद्य जांच से शुरू हुआ मामला अब देश के बड़े टैक्स घोटालों (Tax Scams) में शामिल होता नजर आ रहा है। हैदराबाद (Hyderabadi Biryani) के कुछ बिरयानी रेस्टोरेंट्स (Biryani Restaurants) की जांच के दौरान बिलिंग सॉफ्टवेयर (Billing Software) में कथित हेरफेर का ऐसा नेटवर्क सामने आया, जिसने पूरे भारत में लगभग 70,000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की आशंका खड़ी कर दी है।



  • ऐसे शुरू हुई जांच
    सूत्रों के अनुसार शुरुआत तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ रेस्टोरेंट्स की नियमित जांच से हुई। अधिकारियों को रेस्टोरेंट्स में भारी भीड़ और घोषित आय के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। संदेह गहराने पर उस डिजिटल बिलिंग सॉफ्टवेयर की फॉरेंसिक जांच की गई, जिसका इस्तेमाल देशभर में करीब 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स द्वारा किया जा रहा था।

    टैक्स चोरी का तरीका: सिस्टम के भीतर से खेल
    जांच में सामने आया कि ग्राहकों से पूरी रकम लेने के बावजूद कई लेन-देन रिकॉर्ड से गायब कर दिए जाते थे।

    मुख्य तौर पर अपनाए गए तरीके इस प्रकार बताए जा रहे हैं
    बिल डिलीट करना: भुगतान के बाद बिल सिस्टम से हटा दिए जाते थे। अनुमान है कि करीब 13,000 करोड़ रुपये के बिल इस तरह गायब किए गए।
    कैश ट्रांजैक्शन का दुरुपयोग: नकद भुगतान वाले बिलों को रिकॉर्ड से हटाना आसान होने के कारण इन्हें सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया।
    पूरा दिन या महीना गायब: कुछ मामलों में पूरे दिन या महीने का बिक्री डेटा ही मिटा दिया गया।
    रिटर्न में कम आय दिखाना: कहीं-कहीं बिल मौजूद रहे, लेकिन टैक्स रिटर्न में जानबूझकर कम आंकड़े दर्ज किए गए।

    किन राज्यों में ज्यादा गड़बड़ी?
    प्रारंभिक विश्लेषण में कुल बिक्री का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा छिपाए जाने का अंदेशा जताया गया है।
    टैक्स अनियमितताओं में कर्नाटक शीर्ष पर बताया गया।
    इसके बाद तमिलनाडु और तेलंगाना का स्थान सामने आया।
    आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ही करीब 5,100 करोड़ रुपये की संदिग्ध बिक्री पकड़ी गई।
    अधिकारियों ने जब केवल 40 रेस्टोरेंट्स का भौतिक सत्यापन किया, तो वहां भी लगभग 400 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई।

    जांच एजेंसियों को बड़े नेटवर्क का शक
    जांचकर्ताओं का मानना है कि 70,000 करोड़ रुपये का अनुमान केवल एक बिलिंग सॉफ्टवेयर की जांच से सामने आया है। बाजार में ऐसे कई अन्य सॉफ्टवेयर भी उपयोग में हैं।
    यदि उनकी भी पड़ताल की गई, तो कथित घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है।

    अब डिजिटल फॉरेंसिक पर फोकस

    सरकारी एजेंसियां अब डिजिटल ट्रांजैक्शन, सॉफ्टवेयर लॉग और डेटा रिकवरी के जरिए पूरे नेटवर्क की परतें खंगाल रही हैं। उद्देश्य है ऐसी “डिजिटल टैक्स चोरी” के तरीकों को पहचानकर भविष्य में रोकथाम के लिए सख्त तंत्र तैयार करना।

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