
कोलकाता । मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने कहा कि भाजपा या प्रधानमंत्री (BJP or Prime Minister) को कभी भी आपके मतदान के अधिकार मैं छीनने नहीं दूंगी (I will never let take away your Voting Rights) । इस दौरान उन्होंने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आलोचना की । मुख्यमंत्री ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे असली दिमाग उन्हीं का है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार सुबह मध्य कोलकाता के रेड रोड पर ईद के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “मैं भाजपा या प्रधानमंत्री को कभी भी आपके मतदान के अधिकार छीनने नहीं दूंगी। वे अक्सर कुछ लोगों को घुसपैठिया बताते हैं। खुद वह सबसे बड़े घुसपैठिया हैं। सऊदी अरब की यात्रा के दौरान हाथ मिलाते समय या दुबई की यात्रा के दौरान गले मिलते समय वे हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को क्यों भूल जाते हैं? लेकिन जब भी वह देश लौटते हैं, तो मतदाता सूची से कुछ लोगों के नाम हटाने के बारे में सोचते हैं।” उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में संशोधन प्रक्रिया के दौरान कई नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इस बुराई के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी है। नामों को अंधाधुंध हटाने के इस मामले को लेकर मैंने सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया है। मतदाता सूची से नामों को अंधाधुंध हटाने के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने और लोगों को बांटने की कोशिश करने वालों को नरक में जाना चाहिए । हमेशा याद रखें कि पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक सद्भाव की एक लंबी परंपरा रही है। धर्म के नाम पर लोगों को ध्रुवीकृत करने के सभी प्रयासों का हर कीमत पर विरोध किया जाएगा।” इसी सभा में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी ने भी पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियां भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की ओर से की गई उस घोषणा के बीच आई हैं कि “तार्किक विसंगति” के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए मामलों की पहली पूरक सूची 23 मार्च को प्रकाशित की जाएगी। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लगभग 34 प्रतिशत नामों को न्यायिक अधिकारियों द्वारा मतदान से बाहर रखा गया है। हालांकि, उन्हें इस उद्देश्य के लिए गठित 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों में से किसी में भी जाने का अधिकार होगा।
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