
नई दिल्ली: अमेरिकी सीनेट की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद उपजे संकट के बीच अब अमेरिका ने अपने दो युद्धपोतों को ताइवान जलडमरूमध्य में समुद्री नौवहन के लिए उतारा है. अमेरिका के इस कदम से चीन के साथ तनाव और बढ़ने के संकेत हैं. सीएनन न्यूज को दिए बयान में जापान स्थिति अमेरिका की 7वीं फ्लीट ने कहा है कि रविवार को रविवार को गाइडेड मिसाइल से युक्त अमेरिकी युद्धपोत एंटीएटम और यूएसएस चांसलर्सविले नौवहन स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुदूर समुद्र की अपनी यात्रा की.
बयान में कहा गया है कि इन दोनों युद्धपोतों की यात्रा जारी थी और इस दौरान किसी भी बाहरी सैन्य शक्तियों की ओर से इसमें हस्तक्षेप नहीं किया गया. बयान में कहा गया कि दोनों जंगी जहाज जलडमरूमध्य के गलियारे के माध्यम पारगमन कर रहे हैं. जहाज उस गलियारे से निकल रहे हैं जो किसी भी देश के तटीय सीमाओं और क्षेत्रीय समुद्र से परे है. युद्धपोतों का यह पारगमन भारत-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और खुली आवाजाही की अमेरिकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
110 मील लंबा यह जलखंड समुद्र का वह हिस्सा है जो स्वशासित ताइवान और चीन की मुख्य भूमि को एक-दूसरे से अलग करता है. बीजिंग हमेशा से ताइवान पर अपना संप्रभू अधिकार जताता है लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी के शासन वाले चीन कभी भी ताइवान को नियंत्रण में नहीं कर सका है. हालांकि चीन का मानना है कि ताइवान जलडमरूमध्य चीन के आंतरिक समुद्र का हिस्सा है. इस लिहाज से अमेरिका के साथ उसकी ठन सकती है. यद्यपि अमेरिका ने कहा कि वह समुद्र में हर उस जगह पर जा सकता है जहां अंतरराष्ट्रीय कानून उसे जाने की अनुमति देता है. अमेरिका का मानना है कि ताइवान जलडमरूमध्य का अधिकांश हिस्सा अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है. इसलिए वह वहां कभी भी जा सकता है.
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