नई दिल्ली। ऊर्जा सुरक्षा और उभरती तकनीकों के लिए जरूरी खनिजों (Minerals) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत ने चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। भारत ब्राज़ील, कनाडा, फ्रांस (India, Brazil, Canada, France) और नीदरलैंड्स के साथ क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) की खोज, खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग को लेकर साझेदारी समझौतों पर बातचीत कर रहा है। इसे भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा ट्रांज़िशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर फोकस
रिपोर्टों के अनुसार, इन चर्चाओं का केंद्र लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिज हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक रक्षा तकनीकों के लिए अनिवार्य हैं। भारत इन देशों से उन्नत खनिज-प्रसंस्करण तकनीक तक पहुँच बनाने की भी कोशिश कर रहा है। बातचीत फिलहाल गोपनीय स्तर पर चल रही है।
हालांकि खनन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नई खनन परियोजनाओं को विकसित होने में समय लगता है। केवल खोज चरण में ही 5 से 7 वर्ष लग सकते हैं और हर परियोजना व्यावसायिक उत्पादन तक नहीं पहुँचती।
जर्मनी मॉडल को दोहराने की तैयारी
भारत जनवरी में जर्मनी के साथ हुए क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग समझौते के प्रावधानों को इन नई साझेदारियों में अपनाने पर विचार कर रहा है। उस मॉडल में खोज और प्रसंस्करण के साथ-साथ तीसरे देशों में खनिज संपत्तियों के अधिग्रहण और संयुक्त विकास का प्रावधान भी शामिल था।
खान मंत्रालय की अगुवाई में कूटनीतिक पहल
इस पूरी पहल का नेतृत्व भारत का खान मंत्रालय कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक फ्रांस, नीदरलैंड्स और ब्राज़ील के साथ बातचीत जारी है, जबकि कनाडा के साथ समझौता सक्रिय विचाराधीन है। कनाडा के प्रधानमंत्री के संभावित भारत दौरे के दौरान यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
वैश्विक साझेदारियों का विस्तार
भारत इससे पहले अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ भी क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग समझौते कर चुका है। पेरू और चिली के साथ भी व्यापक वार्ताएँ जारी हैं। यह प्रयास वैश्विक स्तर पर उस रुझान का हिस्सा है, जिसमें कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ रेयर अर्थ्स के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही हैं।
रणनीतिक संसाधन बनते जा रहे क्रिटिकल मिनरल्स
साल 2023 में भारत ने लिथियम सहित 20 से अधिक खनिजों को ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक आर्थिक जरूरतों के लिए ‘महत्वपूर्ण खनिज’ घोषित किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ये खनिज केवल औद्योगिक संसाधन नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक शक्ति का आधार भी बनेंगे और भारत इस प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर चुका है।
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