
नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Union Minister Ashwini Vaishnav) ने कहा कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर है (India is second largest Mobile Manufacturing Center in the World) । भारत का मोबाइल फोन का निर्यात बीते एक दशक में 127 गुना से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में दो लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2014-15 में 0.01 लाख करोड़ रुपए था । यह जानकारी बुधवार को सरकार द्वारा संसद में दी गई।
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मोबाइल फोन के निर्यात में तेज बढ़ोतरी की वजह सरकार द्वारा ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों की मदद से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करना है। इन नीतियों का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के लिए एक संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का निर्माण करना है। सरकार के अनुसार, भारत पिछले 11 वर्षों में मोबाइल फोन का शुद्ध आयातक होने से शुद्ध निर्यातक बन गया है। उन्होंने कहा, “देश अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर है।” इसी अवधि के दौरान, भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामानों का कुल उत्पादन लगभग छह गुना बढ़कर 2014-15 में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए से 2024-25 में लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया, “इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी लगभग आठ गुना बढ़कर 0.38 लाख करोड़ रुपए से लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है।” वैष्णव ने कहा कि भारत ने इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत तैयार उत्पादों के प्रोडक्शन से की थी, और अब ध्यान मॉड्यूल, सब-मॉड्यूल, घटकों और यहां तक कि मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में उपयोग होने वाले कच्चे माल, औजारों और मशीनरी के विकास पर केंद्रित हो गया है।
सरकार ने घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आईटी हार्डवेयर के लिए उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई), इलेक्ट्रॉनिक घटकों और अर्धचालकों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर योजना शामिल हैं। मंत्री ने बताया कि आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना के तहत, तीन स्वीकृत आवेदकों ने महाराष्ट्र राज्य में विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं, और ये सभी लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) हैं, साथ ही बताया कि वैश्विक कंपनियों ने भी भारत में लैपटॉप और सर्वर जैसे उत्पादों का निर्माण शुरू कर दिया है।
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