
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi)और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(US President Donald Trump) के बीच हाल ही में हुई टेलीफोन बातचीत(telephone conversation) के बाद अमेरिकी प्रशासन(US administration) ने स्पष्ट किया है कि भारतीय उत्पादों पर अब केवल 18 फीसदी शुल्क लागू (18 percent tariff imposed )होगा। यह कदम पिछले महीनों में बढ़े हुए शुल्क को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। पहले भारत के उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी तक पहुंच गया था जिससे भारतीय निर्यातकों (Indian exporters)को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा।
जयशंकर ने बताया समझौते का महत्व
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वाशिंगटन दौरे के समापन पर बताया कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापारिक तनाव को कम करेगा और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में नया युग शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्तर पर गति स्पष्ट है और तकनीकी बारीकियों को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में अंतिम रूप दिया जा रहा है। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह यात्रा सकारात्मक और उत्पादक रही है और व्यापार समझौता अंतिम चरण में है।
भारतीय उद्योगों और रोजगार को मिलेगा लाभ
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, शुल्क में यह कमी भारतीय निर्यातकों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। रत्न-आभूषण, कपड़ा, इंजीनियरिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उद्योगों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इससे भारत में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आर्थिक समृद्धि के द्वार खुलेंगे।
व्यापार और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र
व्यापार के अलावा दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। लिथियम, कोबाल्ट और अन्य दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करना दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकता है। भविष्य में रक्षा, ऊर्जा और परमाणु सहयोग के क्षेत्रों में उच्च-स्तरीय बैठकों की संभावना है।
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
अमेरिका ने अपने बाजार खोलने के लिए भारत पर दबाव डाला, लेकिन भारतीय वार्ताकारों ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए। अमेरिकी सामानों पर भारतीय शुल्क शून्य नहीं किया गया ताकि स्थानीय किसानों और उत्पादकों के हितों की रक्षा हो सके।

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