
जिनेवा/संयुक्त राष्ट्र. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें नियमित सत्र के दौरान भारत (India) ने पाकिस्तान (Pakistan) को अंतरराष्ट्रीय मंच (International Forum) पर आईना दिखाते हुए उसे भ्रम की दुनिया में रहने वाला देश बताया है। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के लिए शायद यह यकीन करना असंभव है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का विकास बजट, इस्लामाबाद की ओर से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मांगे गए हालिया आर्थिक पैकेज से दोगुने से अधिक है।
जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने उत्तर देने के अधिकार का उपयोग करते हुए यह तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिस देश में नागरिक सरकारें बमुश्किल ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाती हैं, वहां से लोकतंत्र पर उपदेश लेना हास्यास्पद और खोखला प्रतीत होता है। सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के आम चुनावों और विधानसभा चुनावों में हुआ रिकॉर्ड मतदान इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वहां की जनता ने पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित आतंकवाद और हिंसा की विचारधारा को पूरी तरह नकार दिया है।
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था और रहेगा
भारत ने फिर वैश्विक मंच पर यह दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। सिंह ने कहा कि अब एकमात्र लंबित विवाद पाकिस्तान की तरफ से भारतीय क्षेत्रों पर किया गया अवैध कब्जा है। पाकिस्तान को उन क्षेत्रों को तुरंत खाली कर देना चाहिए। ओआईसी जैसे संगठन पाकिस्तान के दुष्प्रचार का जरिया बनकर अपनी निष्पक्षता खो रहे हैं।
अर्थव्यवस्था बचाने को गुहार लगा रहा पड़ोसी देश
पाकिस्तानी दुष्प्रचार पर कड़ा प्रहार करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर में उद्घाटित दुनिया का सबसे ऊंचा चेनाब रेल ब्रिज नकली है तो निश्चित रूप से पाकिस्तान मतिभ्रम का शिकार है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जहां पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आईएमएफ से गुहार लगा रहा है। जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से तेजी से आगे बढ़ रहा है। ज्ञात हो पिछले वर्ष आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए 9,100 करोड़ रुपये की किस्त मंजूर की थी, जिससे उनकी कुल जारी की गई राशि 19,110 करोड़ रुपये तक पहुंची है।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस अपनाए संयुक्त राष्ट्र : जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र को संबोधित करते हुए आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारत हर तरह के आतंकवाद का कड़ा विरोध करता है। निर्दोष लोगों को निशाना बनाने वाली ऐसी हरकतों का औचित्य नहीं हो सकता। जयशंकर ने यूएनएचआरसी और संयुक्त राष्ट्र निकायों से आतंकवादी कृत्यों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस (शून्य सहनशीलता) की वकालत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे गंभीर उल्लंघन है। विदेश मंत्री ने मानवाधिकारों के मुद्दे पर राजनीति और दोहरे मानकों से बचने की सलाह दी।
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