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अमेरिका में फंसी भारत की IT कंपनियां, अब मंडरा रहा है ये नया खतरा

October 17, 2025

नई दिल्ली: भारतीय आईटी कंपनियां (Indian IT companies) अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही हैं. वे सिर्फ आउटसोर्सिंग सर्विस (Outsourcing Service) देने तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि अब खुद के सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट, प्लेटफॉर्म और एआई-आधारित समाधान भी बना रही हैं. यह बदलाव नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने का संकेत है, लेकिन साथ ही इससे जुड़े बौद्धिक संपदा (Intellectual Property/IP) से जुड़े खतरे भी सामने आ रहे हैं, खासकर अमेरिका जैसे सख्त कानूनी व्यवस्था वाले बाजारों में.

हाल ही में अमेरिका (America) की दो कंपनियों, नैटसॉफ्ट और अपड्राफ्ट (Netsoft and Updraft) ने भारत की हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज पर 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) का मुकदमा किया है. उनका आरोप है कि हेक्सावेयर ने उनके सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल किया है. ये सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि ये दिखाता है कि जैसे-जैसे भारतीय कंपनियां इनोवेशन की ओर बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे कानूनी खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं.


  • भारत की आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा ग्राहक है लेकिन यहीं पर उन्हें सबसे ज्यादा कानूनी जोखिम भी है. अमेरिका की कानून प्रणाली सख्त है और अगर किसी कंपनी पर पेटेंट या सॉफ्टवेयर के गलत इस्तेमाल का आरोप लगता है, तो हर्जाने में करोड़ों डॉलर चुकाने पड़ सकते हैं. यही वजह है कि वहां पर मुकदमेबाज़ी बेहद संवेदनशील और खतरनाक साबित हो सकती है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियां अब सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग, कोड स्वामित्व, और एआई टेक्नोलॉजी पर खुद का हक जताने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन कई बार पुराने क्लाइंट्स, पार्टनरशिप या ओपन-सोर्स कोड का इस्तेमाल स्पष्ट नहीं होता, जिससे विवाद खड़े हो जाते हैं. अमेरिका में कंपनियां तुरंत मुकदमा दायर कर देती हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ता है और कंपनी की साख भी खतरे में आ जाती है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों से बचने के लिए कंपनियां Due Diligence को प्रक्रिया का हिस्सा बना सकती है. इसके अलावा कंपनियां कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टर के साथ स्पष्ट कॉन्ट्रैक्ट बना सकते हैं और AI और सॉफ्टवेयर उत्पादों को पूरी तरह दस्तावेजित कर सकते हैं.

    यह साफ है कि टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ना सिर्फ नवाचार से नहीं होता, बल्कि कानूनी जिम्मेदारियों और सुरक्षा उपायों के साथ ही आगे बढ़ा जा सकता है. हेक्सावेयर का मामला सिर्फ एक उदाहरण है, लेकिन यह बाकी कंपनियों के लिए बड़ा सबक है. जैसे-जैसे भारतीय आईटी फर्में दुनिया के लिए प्रोडक्ट बनाना शुरू कर रही हैं, वैसे-वैसे उन्हें यह भी समझना होगा कि हर कोड लाइन एक कानूनी जोखिम भी बन सकती है.

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