
नई दिल्ली: रूसी तेल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच विदेश मंत्रालय ने भारत का रुख एक बार फिर साफ कर दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत सरकार के लिए 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है. सरकार का मानना है कि देश की जरूरतों को पूरा करना किसी भी रणनीति का मूल आधार होना चाहिए. इसी सोच के साथ भारत अपने ऊर्जा स्रोतों को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने पर काम कर रहा है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक देश या स्रोत पर निर्भर नहीं है. बदलते वैश्विक हालात और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को देखते हुए ऊर्जा आयात में विविधता लाना भारत की मुख्य रणनीति है. बाजार की वास्तविक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार यह सुनिश्चित करती है कि तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो. इससे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ने वाला असर कम किया जा सके.
प्रेस ब्रीफिंग में यह भी साफ किया गया कि भारत के सभी फैसले राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं. रूसी तेल को लेकर हो या किसी अन्य देश से ऊर्जा आयात का मामला, हर कदम ऊर्जा सुरक्षा के उद्देश्य से उठाया जाता है. विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत अपने नागरिकों के लिए किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए सभी विकल्पों पर विचार करता रहेगा.
सरकार का कहना है कि आगे भी भारत अपनी ऊर्जा नीति में संतुलन बनाए रखेगा. अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद देश अपनी जरूरतों और बाजार स्थितियों के अनुसार फैसले लेगा. विदेश मंत्रालय के बयान से यह साफ है कि भारत किसी भी हाल में ऊर्जा आपूर्ति से समझौता नहीं करेगा. आने वाले समय में भी भारत वैश्विक स्तर पर बदलते हालात के अनुरूप अपनी ऊर्जा रणनीति को मजबूत करता रहेगा.
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