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ईरान से लौटे भारतीय छात्रों ने बताई आपबीती, कहा- घरवालों को भी नहीं बता पा रहे थे हम जिंदा हैं

January 18, 2026

नई दिल्‍ली । ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान (Tehran) की सड़कों पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल (security forces) गश्त कर रहे हैं। दुकानें बंद हैं। खौफ में लोग घरों में कैद हैं। इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप होने से परिजनों को यह भी नहीं बता पा रहे थे कि हम ईरान में जिंदा है या नहीं। यह कहना है, शुक्रवार देर रात ईरान से दिल्ली लौटे भारतीय छात्रों (Indian students) का। छात्रों ने बताया कि अराक, कौम, शिराज, मशहद व तेहरान जैसे शहरों में हालात गंभीर हैं।

इनमें शामिल जोया सैय्यद ने बताया कि मैं तेहरान मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस चौथे वर्ष की छात्रा हूं। देखते ही देखते वहां के हालात अस्थिर हो गए। अब भविष्य को लेकर चिंता सता रही है कि वहां कब वापसी होग। जैसे ही यहां विमान से उतरी तो मेरे साथ परिवार ने भी राहत की सांस ली। उन्होंने बताया कि वहां बार-बार इंटरनेट बंद किया जा रहा है। ऐसे में घर वालों से बात नहीं हो पा रही थी तो परिजन भी चिंतित थे। हालांकि, सभी भारतीय सुरक्षित हैं। वहां अब धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं।


  • तेहरान मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र आमिर ने बताया कि वहां कई हफ्तों से सरकार-विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। तेहरान और तब्रीज जैसे बड़े शहरों में एक तरह से कर्फ्यू लगा है। ऐसे में जरूरी चीजों की किल्लत हैै। सर्वाधिक परेशानी लड़कियों को हो रही है। वे दहशत में हैं।

    बच्चों को देख अभिभावकों की आंखों से छलके आंसू
    ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच कई भारतीय वाणिज्यिक उड़ानों से स्वदेश लौट रहे हैं। वापस आए कई भारतीय चिंता से घिरे दिखे। अली नकवी उन 12-13 यात्रियों के समूह में शामिल थे, जो वाणिज्यिक उड़ान से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि हम बड़ी मुश्किल से वापस लौट पाए हैं। हवाई अड्डे पर कुछ अभिभावकों ने ईरान से लौटे अपने बच्चों का फूलों की माला पहनाकर स्वागत किया। एक पिता ने अपनी बेटी को सीने से लगा लिया। इस दौरान आंखों से खुशी और राहत के आंसू छलक पड़े।

    तिरंगा देख सुरक्षाकर्मियों ने मदद की
    ईरान से शुक्रवार देर रात दिल्ली एयरपोर्ट लौटे छात्रों ने बताया कि जब वह वहां से निकल रहे थे, तो जगह-जगह पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात था। तिरंगा देख जवान हर मदद करने को तैयार थे। शबूर अली ने कहा, विश्वविद्यालयों को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। युवाओं के एक ग्रुप ने बतायाा कि वहां तरह-तरह की अफवाहें फैल रही हैं। इससे वहां के हालात और बिगड़ रहे हैं। छात्रों में घबराहट है।

    नौगावां लौटीं दो छात्राएं
    ईरान से वतन वापसी करने वाली अमरोहा की युसरा और अर्श ने वहां के जो हालात बयां किए हैं, उसने रूह कंपा दी। मोहल्ला बंगला निवासी युसरा बतूल और मोहल्ला शाह फरीद निवासी अर्श ने बताया, उन्होंने दो माह पहले ही एमबीबीएस में प्रवेश लिया था, पर सपने पूरे होने से पहले वहां हालात बिगड़ गए। वहीं, ईरान में गाजियाबाद के डीएलएफ कॉलोनी निवासी मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता भी फंसे हैं। अब उनके आने की उम्मीद भी बढ़ गई है।

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