
नगर तथा ग्राम निवेश ने जनरेटिंग एरिया घोषित करने के लिए बुलवाए दावे-आपत्तियां, मास्टर प्लान की 4490 मीटर लम्बाई की सडक़ें होना हंै निर्मित
38 जमीन मालिकों में होलकर चैरिटेबल ट्रस्ट भी शामिल
बाणगंगा रेलवे क्रसिंग से आईएसबीटी कुमेर्डी तक भी बनेगी एक रोड
अन्नापूर्णा से रिंग रोड तक 45 मीटर सडक़ प्रस्तावित
तिलक नगर श्रीनगर पब्लिक स्कूल सेगोयल नगर तक मास्टर प्लान की सडक़
तेजपुर गड़बड़ी पुल एबी रोड से ट्रेजर टाउनशिप की भी रोड
24 से लेकर 45 मीटर चौड़ाई तक होना है 4 सडक़ोंं का निर्माण
इंदौर। नगर निगम (Municipal council) द्वारा मास्टर प्लान (master plan) की 23 सडक़ों का निर्माण किया जाना है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर तोड़ाफोड़ी तो होगी ही, वहीं चौड़ीकरण (widening) में जो मकान, दुकान टूटेंगे उन्हें टीडीआर (TDR) का लाभ दिया जाएगा। महापौर और निगम परिषद् की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव भी पूर्व में मंजूर किया जा चुका है, क्योंकि नकद मुआवजा निगम या शासन नहीं बांट सकता। लिहाजा टीडीआर के जरिए अतिरिक्त एफएआर का लाभ ही जमीन मालिक ले सकेंगे। अभी निगम ने 4 प्रमुख सडक़ों के चौड़ीकरण के लिए 9 लाख स्क्वेयर फीट से अधिक निजी जमीनों को हासिल करने और उसके जमीन मालिकों को टीडीआर का लाभ देने की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश के माध्यम से शुरू करवाई है, जिसके तहत इन सडक़ों में आने वाली जमीनों को उत्पादन क्षेत्र यानी जनरेटिंग एरिया घोषित किया जाएगा। 24 मीटर से लेकर 45 मीटर चौड़ाई की इन सडक़ों की कुल लम्बाई 4490 मीटर है, जिसमें 38 जमीन मालिक शामिल हैं।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक टीडीआर पोर्टल के माध्यम से ही एफएआर की खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया होगी और मास्टर प्लान की सभी सडक़ों पर टीडीआर का लाभ दिया जाएगा। शासन स्तर पर टीडीआर सर्टिफिकेट का लाभ अधिक से अधिक जमीन मालिक हासिल कर सकें, उसके लिए कुछ संशोधन भी भूमि विकास नियम और मास्टर प्लान में कराए जा रहे हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि टीडीआर सर्टिफिकेट पूर्व में भी स्मार्ट सिटी से लेकर अन्य सडक़ों के चौड़ीकरण के दौरान दिए गए हैं। मगर जमीन मालिक अभी तक इसका इस्तेमाल नहीं कर सके। सिर्फ एक ही टीडीआर सर्टिफिकेट कनाडिय़ा रोड के प्रोजेक्ट में एक बिल्डर ने खरीदा है। दूसरी तरफ संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश ने अभी चार प्रमुख सडक़ों में जनरेटिंग एरिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए 15 दिन में दावे-आपत्तियां बुलवाई हैं। संचालक श्रीकांत बनोठ द्वारा प्रकाशित इस जानकारी में तिलक नगर श्रीकृष्ण पब्लिक स्कूल से गोयल नगर पानी की टंकी तक 360 मीटर लम्बाई की 24 मीटर सडक़ के निर्माण में चार जमीन मालिकों की 0.865 हेक्टेयर जमीन ली जा रही है। पिपल्याहाना क्षेत्र में आने वाली इन जमीनों के अलावा बाणगंगा रेलवे क्रॉसिंग से आईएसबीटी कुमेर्डी तक 75 मीटर चौड़ा रोड बनना है, जिसके पहले चरण में 30 मीटर चौड़ाई और 1700 मीटर लम्बाई में 12 जमीन मालिकों की सुखलिया तहसील में आने वाली जमीनों पर टीडीआर का लाभ दिया जाएगा। इन जमीन मालिकों की 2.12 हेक्टेयर जमीन सडक़ निर्माण के लिए ली जाएगी, तो इसी तरह तेजपुर गड़बड़ी पुल एबी रोड से ट्रेजर टाउनशिप को जोडऩे वाली 30 मीटर चौड़ी सडक़, जो कि 1500 मीटर लम्बी है, इसके निर्माण के लिए 21 जमीन मालिकों की 1.2609 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी, जिसमें सृष्टि कंस्ट्रक्शन, सेफुद्दीन कम्बाती से लेकर श्रीकृष्णा देवकॉन, मेकवेल डवलपर्स, इंटरटेनमेंट वल्र्ड डवलपर, संत रामदास गृह निर्माण और सृष्टि कम्पनी सहित कई निजी जमीन मालिक भी शामिल हैं। बिजलपुर तहसील में ये जमीनें हैं। इसी तरह अन्नपूर्णा से रिंग रोड की 45 मीटर चौड़ी और 930 मीटर लम्बी सडक़ में एक ही जमीन मालिक देवी अहिल्याबाई होल्कर एज्युकेशनल ट्रस्ट शामिल है, जिसकी 4.207 हेक्टेयर जमीन ली जाना है। 38 से अधिक जमीन मालिकों और ट्रस्ट की कुल जमीन 8.4529 हेक्टेयर यानी 9 लाख 10 हजार स्क्वेयर फीट से अधिक होती है, जिसके चलते इन चारों सडक़ों की कुल लम्बाई 4490 मीटर होती है। संचालनालय ने इन जमीन मालिकों की सूची प्रकाशित करते हुए प्रस्तावित उत्पादन क्षेत्र यानी जनरेटिंग एरिया घोषित करने के लिए 15 दिन में दावे और आपत्तियां मांगी हैं। ये दावे-आपत्तियां संचालक नगर तथा ग्राम निवेश भोपाल या संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश इंदौर कार्यालय को भेजी जा सकती है। यह भी उल्लेखनीय है कि रियल इस्टेट कारोबारियों की सबसे बड़ी संस्था क्रेडाई के अध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव सहित अतुल झंवर व अन्य सदस्यों ने शासन को कई बार पत्र लिखे और नगरीय प्रशासन और आवास विभाग से अनुरोध किया कि टीडीआर सर्टिफिकेट का लाभ देने के लिए आवश्यक संशोधन भी नियमों में करना होंगे। उसके बाद ही टीडीआर सर्टिफकेट का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। ग्राउंड कवरेज, फिक्स एमओएस, मैकेनाइज्ड पार्किंग सहित अन्य प्रावधान अभी भी मास्टर प्लान में नहीं हो सके हैं। वहीं मेट्रो कॉरिडोर के लिए भी टीओडी पॉलिसी लाई गई है।