
जबलपुर। मध्यप्रदेश के 5 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों की वित्तीय स्थिति को लेकर जारी ताजा कलेक्शन ग्रोथ समरी ने कई अहम संकेत दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बीच नगर निगमों की आय में हुए बदलाव से साफ है कि जहां कुछ शहरों ने राजस्व बढ़ाने में शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं कुछ नगर निगम अब भी अपेक्षित सुधार नहीं कर पाए हैं। प्रॉपर्टी टैक्स, जल कर, किराया, विविध आय और बिल्डिंग परमिशन जैसे प्रमुख स्रोतों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट ने शहरी प्रशासन की कार्यशैली और आर्थिक मजबूती का पूरा खाका सामने रख दिया है।
इंदौर नगर निगम: लगातार नंबर वन
मध्यप्रदेश में आर्थिक रूप से सबसे मजबूत नगर निगम के रूप में इंदौर एक बार फिर शीर्ष पर रहा है। 2024-25 में कुल आय-863.06 करोड़ रुपये थी। जो 2025-26 में बढ़कर 919.26 करोड़ रुपये हो गई। इंदौर में प्रॉपर्टी टैक्स, बिल्डिंग परमिशन और विविध मदों में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। डिजिटल टैक्स कलेक्शन, सख्त वसूली अभियान और बेहतर प्रबंधन के कारण निगम ने अपनी आय में उल्लेखनीय इजाफा किया है। यही वजह है कि इंदौर को शहरी प्रबंधन का मॉडल सिटी माना जा रहा है।
भोपाल नगर निगम: संतुलित लेकिन मजबूत वृद्धि
राजधानी भोपाल में भी आय में अच्छा इजाफा हुआ है। 2024-25 में 232.50 करोड़ रुपये थी, जो 2025-26 में 292.95 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। भोपाल में प्रॉपर्टी और जल कर कलेक्शन में सुधार हुआ है। साथ ही किराया और अन्य स्रोतों से भी आय बढ़ी है। हालांकि राजधानी होने के बावजूद अभी भी आय के मामले में भोपाल इंदौर और जबलपुर से पीछे है।
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