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राजस्व की रेस में इंदौर, जबलपुर आगे, उज्जैन पीछे, भोपाल ने पकड़ी रफ्तार!

April 04, 2026
  • एमपी के बड़े नगर निगमों की आय रिपोर्ट, इंदौर अव्वल, जबलपुर-भोपाल में तेजी, उज्जैन पिछड़ा

जबलपुर। मध्यप्रदेश के 5 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों की वित्तीय स्थिति को लेकर जारी ताजा कलेक्शन ग्रोथ समरी ने कई अहम संकेत दिए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बीच नगर निगमों की आय में हुए बदलाव से साफ है कि जहां कुछ शहरों ने राजस्व बढ़ाने में शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं कुछ नगर निगम अब भी अपेक्षित सुधार नहीं कर पाए हैं। प्रॉपर्टी टैक्स, जल कर, किराया, विविध आय और बिल्डिंग परमिशन जैसे प्रमुख स्रोतों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट ने शहरी प्रशासन की कार्यशैली और आर्थिक मजबूती का पूरा खाका सामने रख दिया है।


    • जबलपुर नगर निगम: सुधार की राह पर
      जबलपुर नगर निगम ने भी इस वर्ष उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। 2024-25 में 524.28 करोड़ रुपये थी, वहीं 2025-26 में लगभग 646 करोड़ रुपये से अधिक आय प्राप्त हुई। जबलपुर में खासतौर पर प्रॉपर्टी टैक्स, जल कर और बिल्डिंग परमिशन से आय में वृद्धि हुई है। निगम द्वारा चलाए गए वसूली अभियान और लंबित करों की रिकवरी का सकारात्मक असर आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि अभी भी इंदौर की तुलना में अंतर बना हुआ है, लेकिन सुधार की गति उत्साहजनक मानी जा रही है।

    इंदौर नगर निगम: लगातार नंबर वन
    मध्यप्रदेश में आर्थिक रूप से सबसे मजबूत नगर निगम के रूप में इंदौर एक बार फिर शीर्ष पर रहा है। 2024-25 में कुल आय-863.06 करोड़ रुपये थी। जो 2025-26 में बढ़कर 919.26 करोड़ रुपये हो गई। इंदौर में प्रॉपर्टी टैक्स, बिल्डिंग परमिशन और विविध मदों में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। डिजिटल टैक्स कलेक्शन, सख्त वसूली अभियान और बेहतर प्रबंधन के कारण निगम ने अपनी आय में उल्लेखनीय इजाफा किया है। यही वजह है कि इंदौर को शहरी प्रबंधन का मॉडल सिटी माना जा रहा है।

    • ग्वालियर नगर निगम: ठहराव की स्थिति
      ग्वालियर नगर निगम की स्थिति लगभग स्थिर बनी हुई है। 2024-25: 174.11 करोड़ रुपये, वहीं 2025-26: 173.28 करोड़ रुपये पर ठहर गई। यहां न तो कोई बड़ी वृद्धि दर्ज हुई और न ही गिरावट। इससे साफ है कि राजस्व बढ़ाने के प्रयासों में अपेक्षित तेजी नहीं आई है। विशेषज्ञ इसे नीतिगत सुस्ती का संकेत मान रहे हैं।

    भोपाल नगर निगम: संतुलित लेकिन मजबूत वृद्धि
    राजधानी भोपाल में भी आय में अच्छा इजाफा हुआ है। 2024-25 में 232.50 करोड़ रुपये थी, जो 2025-26 में 292.95 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। भोपाल में प्रॉपर्टी और जल कर कलेक्शन में सुधार हुआ है। साथ ही किराया और अन्य स्रोतों से भी आय बढ़ी है। हालांकि राजधानी होने के बावजूद अभी भी आय के मामले में भोपाल इंदौर और जबलपुर से पीछे है।

    • उज्जैन नगर निगम: गिरावट बनी चिंता
      उज्जैन नगर निगम की स्थिति सबसे चिंताजनक रही है। 2024-25 में 152.04 करोड़ रुपये से 2025-26 में 125.06 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। उज्जैन में विविध आय और अन्य स्रोतों में भारी गिरावट आई है, जिससे कुल राजस्व प्रभावित हुआ है। यह गिरावट आने वाले समय में विकास कार्यों पर असर डाल सकती है।

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