
तमाम इलाज की सुविधाओं के दावों के बावजूद
अफसरों पर गिरेगी गाज… लंबे समय से पदस्थ अधिकारी एवं इंजीनियरों की होगी वापसी
इंदौर। भागीरथपुरा (Bhagirathpura) में जहरीला पानी (Poisonous water) नलों से सप्लाई किए जाने के बाद बीमार होने से आज एक और महिला (woman) की मौत हो गई। क्षेत्र के निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार गीताबाई नामक महिला को उल्टी दस्त (Vomiting and diarrhea) की शिकायत के बाद उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था। इस महिला के भतीजे चंद्रशेखर ने इस मौत की पुष्टि की है। इस मौत के साथ ही भागीरथपुरा के घटना में मरने वालों की संख्या बढक़र 15 हो गई है। जिला प्रशासन के द्वारा आधिकारिक तौर पर अब भी चार लोगों की मौत की ही पुष्टि की जा रही है। अलबत्ता राज्य सरकार के द्वारा करने वालों को जो 2 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की गई है वह मुआवजा आठ परिवारों को जिला प्रशासन ने दिया है।
प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों में गतिरोध
पिछले कुछ महीनों के भीतर इंदौर में प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के बीच गतिरोध सामने आया था। बताया गया कि दूषित जल आपूर्ति को लेकर भी स्थानीय जनप्रतिनिधि मुखर हो रहे हैं। अधिकारियों पर शिकायतों की सुनवाई नहीं करने के आरोप भी लग रहे हैं।
मानव अधिकार आयोग ने भेजा नोटिस
इंदौर की घटना पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है। आयोग ने पूछा है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने दूषित पानी की सप्लाई को रोकने के लिए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। स्थानीय लोग कई दिनों से दूषित पानी की सप्लाई की शिकायत कर रहे थे। आयोग ने कहा कि यह पीडि़तों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पीने के पानी की सप्लाई करने वाली मुख्य पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजरती पाई गई।
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