
इंदौर। प्राधिकरण का ढर्रा पिछले 5 माह से पटरी से उतरा हुआ है और सभी प्रोजेक्ट लेटलतीफी का शिकार हैं। गत वर्ष 1500 करोड़ रुपए से अधिक का बजट प्रस्तुत करने वाले प्राधिकरण की उपलब्धि बहुत कम है। जितनी घोषणाएं की गई थीं, उन पर अमल नहीं हो पाया। ना तो एमआर-11 और ना एमआर-12 सहित अन्य पूरे हुए और ना ही नए फ्लायओवर पर काम शुरू हुआ, बल्कि डबल डेकर ब्रिज भी लेटलतीफी का शिकार हो गया, जिसे अब मई-जून तक पूरा करने के दावे कल कलेक्टर और सीईओ के दौरे के दौरान किया गया। अहिल्या पथ सहित नई टीपीएस योजनाएं भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। अब आगामी वित्त वर्ष का बजट अगली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा, जो कि 1 हजार करोड़ रुपए से अधिक का ही रहेगा। रंगपंचमी के बाद ही अब बोर्ड बैठक होगी।
शहर विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्राधिकरण के कंधे पर है, क्योंकि मास्टर प्लान की क्रियान्वयन एजेंसी भी वही है। नगर निगम का खजाना तो खाली ही रहता है। ऐसे में मास्टर प्लान की सडक़ें, फ्लायओवर, एमआर सहित अन्य सभी महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों का जिम्मा प्राधिकरण पर ही है, लेकिन पिछले साल के बजट में जो बढ़-चढक़र दावे किए थे उनमें 50 फीसदी भी सफलता नहीं मिल सकी है। कुमेर्डी का आईएसबीटी बीते 8 माह से तैयार पड़ा है, जिसके लिए ठेकेदार की तलाश लगातार जारी है। टीपीएस योजनाओं में विकास कार्यों की गति भी धीमी पड़ी है, तो निर्माणाधीन जो प्रोजेक्ट हैं उसकी भी सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है।
यहां तक कि सिंहस्थ के मद्देनजर एमआर-11, एमआर-12 के साथ-साथ इन पर बनने वाले फ्लायओवर का काम भी गति नहीं पकड़ पाया है, तो लवकुश चौराहा पर बन रहा डबल डेकर ब्रिज, जिस पर प्राधिकरण 180 करोड़ रुपए की बड़ी राशि खर्च कर रहा है, उसका निर्माण साल के अंत तक पूरा हो जाना था, मगर अब 6 महीने लेट हो गया। कल कलेक्टर शिवम वर्मा और सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने इस डबल डेकर ब्रिज के चल रहे निर्माण कार्य की जानकारी ली और निर्देश दिए कि जून माह तक यह ब्रिज तैयार हो जाए, ताकि सिंहस्थ के दौरान शहर में बढऩे वाले यातायात दबाव को कम करने में और आवागमन को सुगम बनाने में इस ब्रिज की मदद मिल सके। कलेक्टर वर्मा ने सर्विस लेन की भी तत्काल मरम्मत करने और उसे व्यवस्थित करने के निर्देश भी एजेंसी को दिए और साथ ही वैकल्पिक यातायात व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने को कहा।
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