
इंदौर। एमआर-4 सडक़ भी बीते कई सालों से अधूरी पड़ी है। पिछले सिंहस्थ में ही इसका निर्माण पूर्ण होना था। मगर एक हिस्सा ही बन पाया। अब आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर इस 35 करोड़ की लागत से बन रही सडक़ को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी निगम ने सडक़ निर्माण शुरू किया, कारखानों की बाधाएं अभी कायम है।
पहले प्राधिकरण ने रेलवे स्टेशन से बाणगंगा रेलवे क्रॉसिंग तक दो लेन की सडक़ बनाई थी और अब निगम उसे पूरी करेगा। हालांकि 200 से अधिक निर्माण भी बाधक हैं, जिसमें भागीरथपुरा बस्ती भी शामिल है, जहां पर जलकांड हुआ और पिछले कुछ समय पूर्व आधा दर्जन कारखानों के निर्माण ही टूट सके थे।
यह एमआर-4 सडक़ यातायात के हिसाब से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो कि शहर के बीच के हिस्से को सुपर कॉरिडोर से जोड़ती है। इससे दो बस स्टैंडों के साथ तीन रेलवे स्टेशन भी कनेक्ट होते हैं। मास्टर प्लान में हालांकि इस सडक़ की चौड़ाई 45 मीटर है, मगर 30 मीटर बनाने का निर्णय लिया गया।
एमआर-10 पर बने नए आईएसबीटी के अलावा लक्ष्मीबाई नगर से आगे सांवेर रोड को भी यह सडक़ जोड़ेगी। अभी नगर निगम ने इस सडक़ का निर्माण शुरू कराया है। हालांकि कारखानों की बाधाएं कायम है। अभी उज्जैन जाने के लिए परदेशीपुरा, आईटीआईटी, चंद्रगुप्त मौर्य प्रतिमा चौराहा जाना पड़ता है।
मगर इस एमआर-4 के बनने के बाद उज्जैन रोड की कनेक्टिीविटी आसान हो जाएगी। राज्य शासन ने भी पूर्व में भी सिंहस्थ मद से इस सडक़ के लिए 12 करोड़ रुपए की राशि दी थी और अब निगम इस सडक़ का निर्माण करवा रहा है। यह भी महत्वपूर्ण है कि रोजाना इस सडक़ से 50 हजार से अधिक वाहन गुजरेंगे और सिंहस्थ में तो यातायात का दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। अभी सुपर कॉरिडोर पर भी कई तरह की गतिविधियां आ रही है और होटल, शॉपिंग मॉल, आईटी पार्क से लेकर मैरिज गार्डन और अन्य निर्माणों के चलते भी एमआर-4 का उपयोग भविष्य में बढ़ जाएगा। बाणगंगा, गौरी नगर, खातीपुरा सहित अन्य इलाकों को भी यह रोड जोड़ेगी। हालांकि 200 से अधिक निर्माणों को हटाने की चुनौती है और कुछ कारखाने भी हटाना पड़ेंगे। कुछ समय पूर्व आधा दर्जन कारखानों के निर्माणों को तोड़ा भी गया था, वहीं आज सुबह भी निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा भी किया और साथ ही हवा बंगला के पीछे की सरकारी जमीन भी देगी।

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