
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर (Indore City) में दूषित पेयजल (Contaminated Water) के कारण फैली बीमारी (Disease Spreads) और जनहानि के मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। शुक्रवार सुबह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक (High-level Review Meeting) के बाद मुख्यमंत्री ने लापरवाही (Negligence) बरतने वाले अधिकारियों पर गाज गिराते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं:
मुख्यमंत्री ने की सख्त समीक्षा
डॉ. मोहन यादव ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित इलाकों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और पाइपलाइन लीकेज जैसी समस्याओं का स्थाई समाधान निकाला जाए।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पानी की सप्लाई के कारण सैकड़ों लोग बीमार हो गए थे और कई लोगों की मौत की दुखद खबर भी सामने आई थी। प्रारंभिक जांच में पता चला कि 40 साल पुरानी पाइपलाइन में लीकेज होने और पास ही स्थित शौचालय के गंदे पानी के मिलने से जल दूषित हुआ था।
मुख्यमंत्री इससे पहले भी दोषियों पर कार्रवाई करते हुए कुछ कनिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर चुके हैं और अब गाज निगम के वरिष्ठ अधिकारियों पर गिरी है।
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