
इंदौर, विकाससिंह राठौर। महू से इंदौर होकर भोपाल जाने और वापस आने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस फिलहाल 24 के बजाय 18 कोच से ही चल रही है। दो बड़े शहरों को जोडऩे वाली इस महत्वपूर्ण ट्रेन के कोच अचानक घट जाने से हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की ओर से कहा गया है कि कोच मेजर मेंटेनेंस के लिए गए हैं, इसलिए कम कोचों के साथ ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। वहीं परेशान हो रहे यात्रियों का सवाल है कि अगर रेलवे को कोचों का मेंटेनेंस करना था तो पहले ही वैकल्पिक कोचों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
भोपाल-इंटरसिटी एक्सप्रेस (19323/19324) प्रदेश की एक लोकप्रिय और महत्वपूर्ण ट्रेन है, जो प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर और सैन्य छावनी महू को राजधानी भोपाल से जोड़ती है। हजारों यात्री दोनों ओर से इसमें सफर करते हैं। इनमें भोपाल में शासकीय काम से जाने वाले आम लोगों के अलावा विद्यार्थी, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी और राजनेता तक शामिल होते हैं। यह ट्रेन सुबह महू से इंदौर होते हुए भोपाल जाती है और शाम को वापस भोपाल से इंदौर होते हुए महू पहुंचती है। इसकी भारी मांग को देखते हुए इसे 24 कोच के साथ चलाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से इसे 24 से घटाकर 20 और अब 17 से 18 कोच के साथ संचालित किया जा रहा है।
देश की कई प्रमुख ट्रेनों का मिलता है कनेक्शन
इस ट्रेन में महू और इंदौर सहित देवास से बड़ी संख्या में यात्री भोपाल जाते हैं। इनमें वे यात्री भी शामिल होते हैं, जिन्हें भोपाल में काम होता है। वहीं बड़ी संख्या में वे यात्री भी इस ट्रेन से सफर करते हैं, जो भोपाल से आगे देश के अन्य बड़े शहरों तक जाने वाली ट्रेनों के कनेक्शन के लिए भोपाल पहुंचते हैं। ट्रेन में कोच कम होने से यात्री क्षमता कम हो गई है। ऐसे में यात्रियों को जाने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रोजाना करीब 500 यात्री की क्षमता कम हुई
रेलवे विशेषज्ञ नागेश नामजोशी ने बताया कि रिजर्वेशन कोच की क्षमता जहां 75 होती है, वहीं सामान्य कोच की क्षमता 80 होती है। यह ट्रेन पिछले दो से तीन महीनों से 17 से 18 कोचों के साथ चल रही है, यानी रोजाना 6 से 7 कोच कम चल रहे हैं। ऐसे में रोजाना एक ओर से करीब 500 यात्रियों की क्षमता कम हो जाने से यात्रियों को भारी परेशानी उठाना पड़ रही है।
वैकल्पिक कोच की व्यवस्था करे रेलवे
नामजोशी ने बताया कि उनकी जानकारी में यह कोच पीरियोडिक ओवरहाल के लिए परेल भेजे गए है। वहां से मेंटेनेंस होकर कितने समय में आएंगे यह तय नहीं है। इसलिए यह परेशानी कब तक बनी रहेगी यह भी कहा नहीं जा सकता। ऐसे में रेलवे को इस ट्रेन के लिए वैकल्पिक कोचों की व्यवस्था करना चाहिए, जिससे यात्रियों को राहत मिले। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन का संचालन कन्वेंशनल कोचों के साथ किया जा रहा है, जिनकी संख्या लगातार कम हो रही है। इसे देखते हुए रेलवे द्वारा इस ट्रेन के लिए एलएचबी कोच की व्यवस्था की जानी चाहिए।
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