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इंदौर: निखर उठा लालबाग का दरबार हॉल, अगले हफ्ते से देख सकेंगे पर्यटक

February 07, 2026

इंदौर। लालबाग का दरबार हॉल नए रूप में पर्यटकों के सामने आने के लिए तैयार है। अगले हफ्ते से पर्यटक इसे देख सकेंगे। फिलहाल बीते दो महीने से यहां काम के चलते इसे पर्यटकों के लिए बंद किया गया था। लालबाग के भीतर का काम दिल्ली की आईजीएनसीए के जिम्मे है। यहां के पुराने एंटीक्स के संरक्षण के साथ ही फिनिशिंग का काम लंबे समय से चल रहा है। नवंबर में दरबार हॉल को पर्यटकों के लिए बंद किया गया था, क्योंकि यहां फिनिशिंग के साथ ही कुछ सुधार काम किए जाने थे।

आईजीएनसीए के विशेषज्ञों ने अब इस काम को पूरा कर लिया है और अगले हफ्ते से पर्यटक दरबार हॉल को देख सकेंगे। काम के चलते फिलहाल यहां आने वाले पर्यटकों को बाहर से ही दरबार हॉल को देखने का मौका मिल रहा था। आईजीएनसीए ने दरबार हॉल को पुराने ही स्वरूप में नई चमक के साथ तैयार किया है। यहां का स्टोकू वर्क (सुनहरे रंग का उभरा काम) पॉलिश और सफाई के साथ रीस्टोर किया है। इसके लिए टीम ने ईयर बड्स, रूई, छोटे ब्रशों से बारीक काम किया है। साथ ही दरबार हॉल की छत पर लगे पानी के दाग भी साफ किए गए हैं।

फॉल सीलिंग का भी कुछ काम किया गया है। लालबाग के बनने के समय किए गए रंग को ही फिर से जानकारों की उपस्थिति में किया गया है, ताकि लालबाग के उसी पुराने वैभव को पर्यटक निहार सकें। बाहरी और कन्वेंशन सेंटर का काम बीते साल जून से मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम कर रहा है, जो सिंहस्थ से पहले पूरा किया जाएगा। यहां आउटर गार्डन, फव्वारे के साथ ही देवी अहिल्याबाई सेंटर फॉर सेल्फ डिफेंस, साइकिलिंग व वॉक के लिए ट्रैक भी बनाए जाने हैं। शहर की इस ऐतिहासिक धरोहर के प्रति पर्यटकों और लोगों की रुचि बढ़ाने के लिए ओपन थिएटर भी प्रस्तावित है।


  • सेंट्रल म्यूजियम की बची मूर्तियां आज होंगी शिफ्ट
    सेंट्रल म्यूजियम (केंद्रीय संग्रहालय) का काम भी चल रहा है। सिंहस्थ से पहले यहां भी कई विकास कार्य किए जाने हैं। यहां बन रही बाउंड्रीवाल का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। स्टोन लगकर पॉलिशिंग के साथ ही ये काम पूरा हो जाएगा। आज कुछ हिस्से से प्राचीन मूर्तियां शिफ्ट की जाएंगी, जिसके बाद टॉयलेट ब्लॉक हटकर वहां कैफेटेरिया, नए टिकट काउंटर और क्लॉक रूम का काम शुरू हो जाएगा।

    दरबार हॉल की विशेषताएं
    इंदौर का लालबाग पैलेस अपनी भव्यता के लिए विश्व प्रसिद्ध है और इसका दरबार हॉल, जिसे दीवान-ए-आम भी कहा जाता है, इस महल का सबसे आकर्षक हिस्सा है।
    – दरबार हॉल का इंटीरियर मुख्य रूप से रोकोको शैलियों से प्रेरित है।
    – इस हॉल के निर्माण में भारी मात्रा में इटली से आयातित सफेद और रंगीन संगमरमर का उपयोग किया गया है।
    – हॉल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बिना बिजली के भी दिन के समय यहां भरपूर प्राकृतिक रोशनी रहती है।
    – हॉल की छतों पर ग्रीक पौराणिक कथाओं के दृश्य चित्रित हैं।
    – छत पर किया गया प्लास्टर ऑफ पेरिस का बारीक काम और उस पर सुनहरी पॉलिश इसे शाही लुक देती है।
    – हॉल की छत से लटके हुए भव्य क्रिस्टल झूमर इसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। ये झूमर उस दौर में यूरोप से मंगवाए गए थे।
    – खिड़कियों और दरवाजों में बेल्जियम के रंगीन कांच का प्रयोग किया गया है, जिस पर होलकर राजवंश के चिह्न (जैसे सूर्य और नंदी) उकेरे गए हैं।
    – यहां रखा गया फर्नीचर जॉर्जियन और रीजेंसी शैली का है, जिसे गुलाब की लकड़ी और शीशम से बनाया गया है।
    – इस हॉल का उपयोग महाराजा द्वारा आम जनता से मिलने और दशहरा या दिवाली जैसे त्योहारों पर दरबार लगाने के लिए किया जाता था।
    – हॉल की दीवारों और कांच के पैनल्स पर होलकर राज्य का आदर्श वाक्य- जो प्रयास करता है, वही सफल होता है… देखा जा सकता है।

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