
इंदौर। शहर के सबसे बड़े कॉलोनाइजर इंदौर विकास प्राधिकरण ने अपना सालाना बजट बोर्ड के माध्यम से मंजूर किया, जिसमें 1021 करोड़ की आय और 994 करोड़ व्यय होना बताया रियल इस्टेट में चल रही मंदी का असर प्राधिकरण की सम्पत्तियों पर भी नजर आया और अनुमान की तुलना में सिर्फ 385 करोड़ के भूखंड और फ्लैट ही गत वित्त वर्ष में बिक सके। अलबत्ता एक हजार करोड़ रुपए की जो एफडी करा रखी है, उसके एवज में अवश्य 70 करोड़ 47 लाख रुपए ब्याज-बट्टे से कमा लिए। 193 करोड़ के विकास कार्यों के टेंडर भी कल बोर्ड ने मंजूर किए, तो नए फ्लायओवरों के निर्माण के साथ मास्टर प्लान सहित एमआर सडक़ों के निर्माण का भी निर्णय लिया गया।
एक बड़ा लाभ योजना 78 अरण्य कोर हाउस में रहने वाले 2 हजार परिवारों को लीज नवीनीकरण निर्णय के चलते मिलेगा। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा और नगर निगम के साथ समन्वय किया जाएगा। कल शाम प्राधिकरण बोर्ड की बैठक 5 बजे शुरू हुई और दो घंटे बाद अध्यक्ष और संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े की मौजूदगी में लिए गए निर्णयों की जानकारी मीडिया को दी गई। डॉ. खाड़े ने बताया कि 2026-27 के बजट में फ्लायओवर, मास्टर प्लान की सडक़ों, टीपीएस, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर आधारित कन्वेंशन सेंटर पर विशेष फोकस किया गया है। दशहरा मैदान के पास 35 करोड़ की लागत से स्पोटर््स काम्प्लेक्स का निर्माण और चंदन नगर चौराहा पर 60 करोड़ की लागत से फ्लायओवर निर्मित किया जाएगा।
योजना 134 में वरिष्ठ नागरिकों के लिए जो स्नेह धाम निर्मित किया गया उसके संचालन-संधारण के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया की जाएगी, वहीं विभिन्न टीपीएस योजनाओं में जो इलेक्ट्रीफिकेशन और अन्य सर्विसेस पर लगभग 1100 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाना है उसके लिए टाटा कंसल्टिंग, इंजीनियरिंग के टेंडर को मंजूरी दी गई है। टीपीएस-8 में सडक़ों, फ्लायओवरों के निर्माण के अलावा योजना 166, 151, 169-बी सहित अन्य में 193 करोड़ रुपए के विकास कार्यों के टेंडर भी बोर्ड ने मंजूर किए। इसके अलावा हरश्रंगार कॉम्प्लेक्स, अमलतास सहित अन्य आवासीय बहुमंजिला बिल्डिंगों में खाली पड़े फ्लेटों को पहले पाओ-पहले पाओ योजना के तहत व्ययन करने का भी निर्णय हुआ। योजना 78 प्रथम लोहा मंडी के 32 भूखंडों में लीज शर्तों के उल्लंघन की जो शिकायतें मिलीं उसके बारे में मौका रिपोर्ट मुताबिक निर्णय लेने के लिए सीईओ को अधिकृत किया गया है। इसी तरह योजना 172 के अभिन्यास को नगर तथा ग्राम निवेश को अनुमोदन के लिए भेजे जाने का भी फैसला किया गया।
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