
इंदौर, संजीव मालवीय। भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली मुख्यालय ने आजीवन सहयोग निधि अभियान में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने के लिए सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे अभियान के तहत ली जाने वाली राशि नकद नहीं ले, बल्कि उसका चैक लें, ताकि हिसाब-किताब में कोई अड़चन न आए। यही नहीं जिन कूपनों के माध्यम से राशि एकत्रित की जाती है, उसकी छपाई भी रोक दी गई है।
हर साल भाजपा आजीवन सहयोग निधि के तहत कार्यकर्ताओं से राशि एकत्रित करती है। वैसे कहा जाता है कि यह राशि कार्यकर्ता संगठन चलाने के लिए देता है, लेकिन यह राशि चंदे के रूप में एकत्रित की जाती है, जिसमें व्यापारियों, उद्योगपतियों और अन्य वर्ग के लोगों से कूपन के माध्यम से राशि ली जाती है। अभी तक 20 हजार रुपए से अधिक की राशि चैक के माध्यम से ली जाती रही है, जबकि इससे कम राशि के कूपन प्रदेश संगठन छपवाकर देता है। इंदौर में इस बार 11 करोड़ रुपए की राशि संगठन को जमा करवाने का टारगेट रखा गया है।
इसी बीच दिल्ली मुख्यालय से खबर आई है कि अब कोई भी राशि बिना चैक के माध्यम से नहीं ली जाएगी। कितनी भी छोटी से छोटी राशि हो, उसका चैक लेना होगा और उसे पार्टी के खाते में जमा करना होगा, वहीं डिजिटल पेमेन्ट को भी माध्यम बनाया जा सकता है। प्रदेश संगठन के सूत्रों का कहना है कि यह आदेश सभी राज्यों के लिए लागू होगा। फिलहाल प्रदेश में छप रहे कूपन पर भी रोक लगा दी गई है। लिखित आदेश का इंतजार किया जा रहा है और उसके बाद आजीवन सहयोग निधि की राशि किस तरह से ली जाएगी, उसकी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। फिलहाल तो तय है कि अब बिना चैक के राशि नहीं ली जाना है।
चैक लेने से आएगी परेशानी
आजीवन सहयोग निधि अभियान से जुड़े भाजपा के नेता मानते हैं कि चैक लेने से परेशानी बढ़ेगी। प्रत्येक चैक का हिसाब रखना होगा। उसे बैंक भेजना होगा। इसमें और भी कार्यकर्ताओं की आवश्यकता पड़ेगी। कोई चैक बाउंस हो जाता है तो उसका हिसाब भी रखना होगा और संबंधित व्यक्ति को वह चैक भेजकर फिर से दूसरा चैक लेना होगा। पिछले सालों में ऐसा कई बार हुआ है, जब चैक बाउंस हो गए थे और उसको लेने के चक्कर में संबंधित व्यक्ति के चक्कर लगाना पड़े थे। कूपन से 20 हजार रुपए तक की राशि पर वर्कलोड कम हो जाता था और ज्यादा कागजी काम भी नहीं करना होते थे।
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