
इन्दौर सहित सेंट्रल इंडिया के अस्पताल में पहली बार अब
इंदौर। आग (fire) या केमिकल (chemicals) से जले मरीजों (burn victims) के अलावा दुर्घटना में घायलों सहित कॉर्निया (Cornea) और आंख की सतह, त्वचा, स्टेमसेल्स से सम्बन्धित अनेक गम्भीर बीमारियों के इलाज में काम आने वाली गर्भनाल (umbilical cord) की ऊपरी झिल्ली को अब इंदौर के एक निजी अस्पताल में न सिर्फ एक साल तक सुरक्षित रखा जा सकेगा, बल्कि अन्य कई गम्भीर बीमारियों का भी इलाज किया जा सकेगा ।
दस मरीजों का इलाज कर सकती है गर्भनाल की ऊपरी झिल्ली
सेम्स की सीनियर डॉ. श्रेया थत्ते और सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सुष्मित कोस्टा ने बताया कि फिलहाल गर्भनाल के ऊपरी आवरण को अस्पताल में एक साल तक 80 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर स्पेशल रेफ्रिजरेटर में रखा जाएगा। इसकी गुणवत्ता की हर दो सप्ताह में नियमित रूप से जांच भी की जाएगी। खास बात यह है कि गर्भनाल की एक ऊपरी झिल्ली से अलग-अलग बीमारियों से ग्रस्त लगभग 10 मरीजों का इलाज हो सकेगा। सामान्य परिस्थितियों में एक गर्भनाल का फायदा अलग-अलग ब्लड ग्रुप वाले मरीजों को मिल सकता है। इसमें किसी तरह का कोई रिजेक्शन नहीं होता है।
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