
इंदौर। निशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत वर्तमान शैक्षणिक सत्र में नर्सरी, केजी 1 और केजी 2 के विद्यार्थियों की संख्या राज्य शिक्षा केंद्र के पोर्टल पर नाम के साथ दर्ज कराना अनिवार्य है। निजी स्कूल अपने यहां निशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम में कम बच्चों के प्रवेश को लेकर धांधलिया करने से बाज नहीं आ रहे। चमेलीदेवी स्कूल में निरीक्षण के दौरान नर्सरी कक्षा के 74 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे, जबकि पोर्टल पर 39 बच्चों की संख्या ही दर्ज है।
इंदौर जिले के निजी स्कूल निशुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को प्रवेश देने के लिए बचने या निर्धारित संख्या से कम प्रवेश देने की कोशिश हमेशा करते रहे हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के द्वारा आगामी 2026- 27 शैक्षणिक सत्र मैं आरटीई के तहत प्रवेश देने के लिए वर्तमान सत्र में निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की संख्या के 25 फीसदी प्रवेश दिया जाना है।
डीपीसी संजय कुमार मिश्र ने कल चमेलीदेवी स्कूल में निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नर्सरी कक्षा के बच्चों की संख्या यू डाइस पोर्टल पर सही अंकित नहीं है। प्रबंधन और प्राचार्य दोनों को आगाह किया गया कि आज शाम तक बच्चों की सही संख्या अंकित की जाए। स्कूल में नर्सरी के दो सेक्शन संचालित किया जा रहे थे, जिनमें क्रमश: 40 और 34 बच्चों के नाम उपस्थिति रजिस्टर में पाए गए, जबकि पोर्टल पर 39 बच्चों की इंट्री ही की गई। इससे आरटीई में प्रवेश संख्या कम हो जाती है और निशुल्क बढ़ाने वाले विद्यार्थियों को कम एडमिशन मिलता।
और भी होंगे निरीक्षण, उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई
डीपीसी संजय कुमार मिश्र ने बताया कि इंदौर बड़ा महानगर है। यहां पर निजी स्कूलों की संख्या प्रदेश में सर्वाधिक है। अब बीआरसी स्तर पर निजी स्कूलों के निरीक्षण किए जाएंगे। वर्तमान नर्सरी, केजी वन और केजी 2 के विद्यार्थियों की संख्या पोर्टल पर दर्ज है या नहीं, इसका भौतिक सत्यापन मौके पर जाकर किया जाएगा। सही संख्या सामने आने से ज्यादा बच्चों को आरटीई में एडमिशन मिल सकेगे।
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