
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते युद्ध तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले चार कारोबारी सत्रों के दौरान निवेशकों (Investors) की संपत्ति में 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आ गई है। युद्ध की स्थिति लंबी खिंचने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशकों में घबराहट का माहौल बना हुआ है।
शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 1100 अंक टूटकर 79 हजार के स्तर से नीचे बंद हुआ, जबकि निफ्टी 315.45 अंक गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ। सिर्फ शुक्रवार को ही निवेशकों की करीब 3 लाख करोड़ रुपये की पूंजी बाजार से साफ हो गई।
बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
गिरावट का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों पर देखने को मिला। आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में लगभग 3.39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक जैसे प्रमुख शेयरों में भी 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।
बाजार पूंजीकरण के आंकड़ों के अनुसार बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 27 फरवरी को 463.25 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर करीब 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी
विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में फिर से बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू कर दी है। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी निवेशक अक्सर सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करते हैं, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ जाता है।
इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की गिरावट को और तेज किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर लगभग 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
कई शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर
बीएसई 500 सूचकांक में शामिल कई कंपनियों के शेयर अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। इनमें एसीसी, अंबुजा सीमेंट, एल्काइल एमिन्स केमिकल्स, साइएंट, बर्जर पेंट्स इंडिया, कोहांस लाइफसाइंसेज, इंद्रप्रस्थ गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, बिरला कॉर्पोरेशन, जेके लक्ष्मी सीमेंट, जुबिलेंट फार्मावा, प्रॉक्टर एंड गैंबल हाइजीन एंड हेल्थ केयर और सोनाटा सॉफ्टवेयर जैसे शेयर शामिल हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा गिरावट करीब दो से तीन प्रतिशत के सुधार के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि फिलहाल निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है क्योंकि वैश्विक तनाव के कारण बाजार पहले ही लगभग 8 प्रतिशत तक टूट चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर होते हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है, तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया की स्थिति, विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन पर रहेगी।
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