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IPL से जुड़ी फ्रेंचाइजी का बड़ा संकेत, ‘द हंड्रेड’ में पाक खिलाड़ियों पर लग सकता है ब्रेक

February 20, 2026

नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान(India and Pakistan) के बीच तनावपूर्ण कूटनीतिक रिश्तों का असर अब क्रिकेट की फ्रेंचाइजी(Cricket franchises) लीगों पर भी दिखाई दे सकता है। ताजा रिपोर्ट्स(Latest reports) के अनुसार, आगामी सत्र में इंग्लैंड(England) की टी20 लीग The Hundred में उन टीमों द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों(Pakistani players) पर विचार नहीं किया जा सकता, जिनका स्वामित्व आंशिक रूप से इंडियन प्रीमियर लीग यानी Indian Premier League (आईपीएल) फ्रेंचाइजी के पास है। अगले महीने होने वाली खिलाड़ी नीलामी से पहले यह संकेत क्रिकेट जगत में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

21 जुलाई से 16 अगस्त तक प्रस्तावित इस टूर्नामेंट के नए सत्र में निजी निवेश बढ़ने के कारण खिलाड़ियों के वेतन में उल्लेखनीय इजाफा होने वाला है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर आईपीएल से जुड़ी फ्रेंचाइजी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नज़रअंदाज करती हैं, तो वे इस आर्थिक लाभ से वंचित रह सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला सीधे तौर पर आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है, लेकिन भारत-पाकिस्तान के मौजूदा राजनीतिक संबंधों की पृष्ठभूमि में इसे एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

ब्रिटिश मीडिया संस्थान BBC की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक खिलाड़ी एजेंट को संकेत दिया है कि उसके पाकिस्तानी खिलाड़ियों में दिलचस्पी केवल उन्हीं टीमों तक सीमित रहेगी, जिनका आईपीएल से कोई संबंध नहीं है। हालांकि इस संबंध में किसी भी बोर्ड या फ्रेंचाइजी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

‘द हंड्रेड’ में कुल आठ फ्रेंचाइजी हिस्सा लेती हैं। इनमें से कई टीमों में आईपीएल से जुड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी है। उदाहरण के तौर पर Manchester Super Giants, MI London, Southern Brave और Sunrisers Leeds जैसी टीमों का स्वामित्व आंशिक रूप से उन संस्थाओं के पास है जो आईपीएल फ्रेंचाइजी भी संचालित करती हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इन टीमों की नीतियों पर आईपीएल की कारोबारी और रणनीतिक प्राथमिकताओं का प्रभाव पड़ सकता है।

 


  • रिपोर्ट में एक अन्य एजेंट ने इस स्थिति को भारतीय निवेश वाली टी20 लीग में “एक अनलिखा नियम” करार दिया। गौरतलब है कि 2008 के बाद से पाकिस्तानी खिलाड़ी आईपीएल में हिस्सा नहीं ले पाए हैं। अब यदि यही रुख विदेशी लीगों में आईपीएल से जुड़ी फ्रेंचाइजी भी अपनाती हैं, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय टी20 बाजार में पाक खिलाड़ियों की मौजूदगी पर पड़ सकता है।

    क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट अब केवल खेल नहीं, बल्कि बड़ा व्यावसायिक मॉडल बन चुका है। ऐसे में निवेशकों के हित, राजनीतिक परिस्थितियां और वैश्विक संबंध भी टीम चयन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय नीलामी के दौरान ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल संकेत यही हैं कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए राह आसान नहीं दिख रही।

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