तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच लेबनान ने ईरान के राजदूत मोहम्मद रेजा शीबानी (Mohammad Reza Sheibani) को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ (Persona non grata) घोषित कर 29 मार्च तक देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। इस कदम को क्षेत्रीय स्तर पर ईरान के बढ़ते अलगाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
लेबनानी विदेश मंत्रालय के अनुसार विदेश मंत्री यूसुफ रागी ने ईरान के प्रभारी दूत तौफीक समादी खोशखो को तलब कर फैसले की जानकारी दी। साथ ही लेबनान ने राजनयिक मानदंडों के उल्लंघन का हवाला देते हुए अपने राजदूत को भी तेहरान से परामर्श के लिए वापस बुला लिया है।
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब इजरायल, ईरान और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष ने लेबनान की आंतरिक स्थिति को अस्थिर कर दिया है। लेबनानी अधिकारियों का आरोप है कि हिजबुल्लाह और ईरान समर्थित नेटवर्क देश को गंभीर संकट की ओर धकेल रहे हैं।
लेबनान का फैसला अलग-थलग नहीं है। हाल ही में कतर ने रास लाफान गैस संयंत्र पर हमले के बाद कई ईरानी सैन्य अटैचियों को निष्कासित किया। वहीं सऊदी अरब ने अपने क्षेत्र पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद पांच ईरानी राजनयिकों को अवांछित घोषित कर दिया था।
राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि हिजबुल्लाह की गतिविधियां देश को “पतन” की ओर ले जा रही हैं और इसके पीछे ईरानी समर्थन है। उन्होंने आरोप लगाया कि मिसाइल हमलों का उद्देश्य लेबनानी राज्य को अराजकता में झोंकना था।
2 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल पर रॉकेट दागे जाने के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हमले किए, जिनमें 1000 से अधिक लोगों की मौत और लाखों लोगों के विस्थापित होने की खबर है। इजरायली सेना अभी भी दक्षिणी लेबनान में तैनात है।
प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने आरोप लगाया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर हिजबुल्लाह के सैन्य अभियानों का प्रत्यक्ष मार्गदर्शन कर रहा है। इसके बाद लेबनान सरकार ने हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाते हुए आईआरजीसी से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए।
इधर, इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने लेबनान के फैसले का स्वागत करते हुए इसे संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।
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