
नई दिल्ली. ईरान (Iran) में हालात तेजी से नियंत्रण से बाहर होते नजर आ रहे हैं. महंगाई, बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था (economy) के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन अब सीधे इस्लामिक रिपब्लिक (Islamic Republic) की सत्ता को चुनौती दे रहा है. यह विरोध प्रदर्शन छठे दिन तक देश के कम से कम 50 शहरों में फैल चुका है, जिनमें तेहरान, मशहद, क़ोम, इस्फहान और खुज़ेस्तान जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं.
सबसे चौंकाने वाली तस्वीरें उन अंतिम संस्कारों से सामने आई हैं, जहां सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए प्रदर्शनकारियों को दफनाया जा रहा था. इन शवयात्राओं में लोग खुलेआम “खामेनेई मुर्दाबाद” और “पहलवी वापस आएगा” जैसे नारे बुलंद करते दिखे.
ख़ासतौर से से मशहद, जो शिया धर्मगुरुओं की प्रमुख नगरी है, वहां भी सत्ता विरोधी और राजशाही समर्थक नारे सुनाई देना शासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
प्रदर्शनकारी बताते हैं कि देश की समस्या केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक टूटन भी है. एक प्रदर्शनकारी का कहना था कि लोगों की जेब और फ्रिज दोनों खाली हैं, और हर दिन वे खुद को अधिक गरीब होते देख रहे हैं. बढ़ती महंगाई, खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें और रोजगार की कमी ने आम जनता की सहनशक्ति समाप्त कर दी है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने ईरानी सरकार की हिंसक कार्रवाई पर चिंता जताई है और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करने की अपील की है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को निशाना न बनाया जाए. वहीं, ईरान के विदेश मंत्री ने ट्रंप के बयान को खतरनाक और उकसाने वाला बताया है.
इस बीच, निर्वासित ईरानी राजनेता और पहलवी वंश के नेता रजा पहलवी ने ट्रंप के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है. वर्तमान हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यह आंदोलन केवल विरोध नहीं, बल्कि एक बड़े सत्ता परिवर्तन की मांग में बदलता जा रहा है.
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