
नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है. वरिष्ठ अधिकारियों व विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव (Military confrontation) कुछ ही दिनों में शुरू हो सकता है. अमेरिकी समाचार एजेंसी एक्सियोस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध कई हफ्तों तक जारी रह सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल के पूर्व सैन्य खुफिया प्रमुख आमोस याडलिन ने कहा कि संघर्ष की संभावना पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है. उनका कहना है कि अमेरिका जैसे महाशक्ति युद्ध में तुरंत नहीं कूदती, लेकिन सैन्य तैयारियां स्पष्ट संकेत दे रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने आने वाले हफ्तों में सैन्य कार्रवाई की संभावना 90 प्रतिशत तक बताई है.
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सूत्रों का कहना है कि ट्रंप ईरान के रुख से नाराज हैं और ‘सभी विकल्प खुले हैं’ वाला बयान अब विश्वसनीय सैन्य तैयारी के साथ जुड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि यदि हमला होता है तो वह सीमित या प्रतीकात्मक नहीं बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला व्यापक अभियान हो सकता है, जिसमें इजरायल की भी संयुक्त भूमिका होगी.
युद्ध में इजरायल भी हो सकता है शामिल
इजरायल की ओर से भी युद्ध की आशंका को लेकर संकेत मिले हैं. सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के सांसद बोअज बिस्मुथ ने कहा कि देश चुनौतीपूर्ण दिनों का सामना कर रहा है और हर नागरिक यह सवाल पूछ रहा है कि ईरान के साथ टकराव कब होगा. इजरायली अधिकारियों के मुताबिक सेना कई संभावित परिदृश्यों के लिए तैयारी कर रही है.
तनाव के बीच तेहरान प्रांत के परंद इलाके में बुधवार को आग लगने और धमाकों जैसी आवाजें सुनाई देने की खबरों ने आशंकाएं और बढ़ा दीं. हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि धुआं नदी किनारे घास जलने की वजह से उठा था और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है.
दोनों देशों के बीच जिनेवा में चल रही बातचीत
बता दें कि कूटनीतिक मोर्चे पर जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता का दूसरा दौर हुआ. ईरान ने दावा किया कि दोनों पक्ष मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमत हुए हैं, लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि तेहरान अब भी वॉशिंगटन की रेड लाइंस को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रहा है. अमेरिका ने साफ किया है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा.
इस बीच ओपन-सोर्स फ्लाइट डेटा के मुताबिक अमेरिका ने एफ-22, एफ-35 और एफ-16 जैसे लड़ाकू विमानों समेत कई सैन्य संसाधन मध्य-पूर्व की ओर भेजे हैं. दूसरी ओर ईरान ने रूस के साथ ओमान सागर और उत्तरी हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की है, जबकि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धाभ्यास शुरू किया है. दोनों पक्षों की तेज सैन्य तैयारियों ने पूरे पश्चिम एशिया को संभावित बड़े युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है, जिसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं.
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