तेहरान/अबू धाबी। खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध (War) ने नया मोड़ ले लिया है। ईरान (Iran) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख गैस उत्पादन केंद्र शाह गैस फील्ड (Shah Gas field) पर ड्रोन हमला कर आग लगा दी। यह फील्ड ADNOC और (Occidental Petroleum) के संयुक्त संचालन में है।
यूएई सरकार ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर फील्ड का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। हालांकि, अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
एयरपोर्ट के बाद अब ऊर्जा ठिकाने निशाने पर
इस हमले से एक दिन पहले ईरान ने दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के ईंधन टैंक को निशाना बनाया था, जिससे शहर के ऊपर काला धुआं छा गया और उड़ानें अस्थायी रूप से रोकनी पड़ीं। मंगलवार सुबह तक स्थिति सामान्य हुई, लेकिन रातभर ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण हवाई क्षेत्र बंद रखना पड़ा।
18वें दिन और घातक हुआ युद्ध
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अब तक 4000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है—
ईरान में करीब 3100
लेबनान में 850
खाड़ी देशों और इजरायल में दर्जनों
13 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए
ईरान ने युद्धविराम के संकेत नहीं दिए हैं और खाड़ी देशों व इजरायल पर हमले जारी रखे हैं। वहीं अमेरिका और इजरायल भी तेहरान समेत कई ठिकानों पर लगातार हमले कर रहे हैं।
तेल-गैस आपूर्ति पर बड़ा असर
होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है।
ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास
युद्ध के बाद कीमतों में 40% तक उछाल
अमेरिका में पेट्रोल 3.70 डॉलर/गैलन
कतर ने LNG उत्पादन रोका, जबकि UAE, सऊदी अरब, इराक और कुवैत को उत्पादन घटाना पड़ा है।
ट्रंप की मदद की अपील, NATO पर तंज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों, यूरोप और चीन से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि कई देशों से युद्धपोत भेजने को कहा गया है, लेकिन अब तक कोई खुलकर सामने नहीं आया।
ट्रंप ने NATO पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका ने सुरक्षा के लिए भारी खर्च किया, लेकिन अब सहयोग नहीं मिल रहा। उन्होंने ईरान के खार्ग द्वीप पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
निष्कर्ष
ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने साफ कर दिया है कि यह संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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