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टी20 वर्ल्ड कप की मेजबानी बनी अभिशाप? इतिहास के साए में भारत पर भी संकट के बादल

February 26, 2026

नई दिल्ली ।टी20 वर्ल्ड कप (T20WorldCup)में अपने घर पर खेलना किसी भी टीम के लिए गर्व की बात होती है। घरेलू दर्शकों का समर्थन, परिचित पिचें, मौसम की समझ और परिस्थितियों पर पकड़ आमतौर पर मेजबान टीम को बढ़त दिलाती है। लेकिन जब बात टी20 वर्ल्ड कप की आती है तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आती है।2007 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट(Tournament) के इतिहास पर नजर डालें तो एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आता है कि आज तक कोई भी मेजबान देश ट्रॉफी (Trophy) अपने नाम नहीं कर पाया है।घर पर खेलना किसी भी टीम के लिए एक बड़ा फायदा (Advantage) माना जाता है, लेकिन कई बार यही स्थिति खिलाड़ियों (Status Players)पर अतिरिक्त दबाव भी बना देती है। यही कारण है कि तमाम कोशिशों के बावजूद मेजबान टीम खिताब जीतने में सफल नहीं हो पाई है ।

पहला टी20 वर्ल्ड कप 2007 में South Africa में खेला गया था। उम्मीद थी कि अफ्रीकी टीम घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाएगी लेकिन वह सुपर 8 से ही बाहर हो गई। इसके बाद 2009 में England और 2010 में West Indies ने मेजबानी की। दोनों ही टीमें सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सकीं।

2012 में Sri Lanka ने टूर्नामेंट की मेजबानी की और यह एकमात्र मौका रहा जब कोई मेजबान टीम फाइनल तक पहुंची। श्रीलंका ने शानदार प्रदर्शन किया लेकिन खिताबी मुकाबले में वेस्टइंडीज से हार गई और ट्रॉफी हाथ से निकल गई। इसके बाद 2014 में Bangladesh मेजबान बना लेकिन उसकी टीम सुपर 10 से आगे नहीं बढ़ पाई।

2016 में India ने टी20 वर्ल्ड कप की मेजबानी की। घरेलू मैदान और जबरदस्त समर्थन के बावजूद टीम इंडिया सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गई। एक बार फिर यह साबित हुआ कि मेजबानी जीत की गारंटी नहीं है।

2021 का टूर्नामेंट United Arab Emirates और Oman में आयोजित हुआ। दोनों ही टीमें ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सकीं। 2022 में Australia मेजबान था लेकिन वह भी सुपर 12 चरण से आगे नहीं जा पाया।

2024 में United States और West Indies ने संयुक्त रूप से मेजबानी की। दिलचस्प बात यह रही कि ट्रॉफी भारत ने जीती लेकिन दोनों मेजबान टीमें सुपर 8 से बाहर हो गईं।

अब 2026 में फिर इतिहास खुद को दोहराता नजर आ रहा है। इस बार भारत और श्रीलंका संयुक्त मेजबान हैं। श्रीलंका पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है। भारत अभी पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है लेकिन उस पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगर भारत भी खिताब जीतने में नाकाम रहता है तो यह सिलसिला और मजबूत हो जाएगा कि टी20 वर्ल्ड कप की मेजबानी किसी वरदान से ज्यादा अभिशाप साबित होती है।

सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। क्या घरेलू दबाव खिलाड़ियों पर भारी पड़ता है। क्या अपेक्षाओं का बोझ प्रदर्शन को प्रभावित करता है। या फिर टी20 जैसे छोटे प्रारूप में किस्मत और मौके का रोल इतना बड़ा होता है कि होम एडवांटेज भी फीका पड़ जाता है।


  • फिलहाल नजरें 2026 पर टिकी हैं। क्या भारत इस मिथक को तोड़ पाएगा या फिर मेजबान टीम के लिए ट्रॉफी दूर का सपना ही बनी रहेगी। इतिहास गवाही दे रहा है लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती भी है।

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