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सोशल मीडिया की लत बीमारी है? इंस्टाग्राम चीफ ने कोर्ट में रखी अलग राय

February 12, 2026

डेस्क: लॉस एंजेलिस में इन दिनों सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा चल रहा है. इसी सुनवाई के दौरान इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी ने अदालत में कहा कि वे इस बात से सहमत नहीं हैं कि लोग सोशल मीडिया के क्लिनिकली एडिक्टेड यानी चिकित्सकीय रूप से लती हो जाते हैं.

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कई परिवार आरोप लगा रहे हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं. इस केस में Meta (इंस्टाग्राम और फेसबुक की कंपनी) और गूगल का YouTube मुख्य आरोपी हैं. TikTok और Snap पहले ही समझौता कर चुके हैं. माना जा रहा है कि इस फैसले का असर हजारों ऐसे मामलों पर पड़ सकता है.

इस मुकदमे के केंद्र में 20 साल की एक युवती है, जिसकी पहचान KGM नाम से की गई है. उसके साथ दो और लोगों के मामलों को टेस्ट केस के तौर पर चुना गया है. इन मामलों के जरिए यह देखा जाएगा कि जूरी किसकी दलील को ज्यादा मजबूत मानती है. परिवार का आरोप है कि सोशल मीडिया कंपनियों ने ऐसे फीचर्स और एल्गोरिद्म बनाए जो बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय ऐप पर रोके रखते हैं. उनका कहना है कि इसी वजह से बच्चों में डिप्रेशन, चिंता और दूसरे मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं.


  • कोर्ट में मोसेरी ने कहा कि किसी चीज का ज्यादा इस्तेमाल और मेडिकल लत दोनों अलग बातें हैं. उनके मुताबिक कई लोग इंस्टाग्राम पर जरूरत से ज्यादा समय बिताते हैं और बाद में उन्हें बुरा लगता है, लेकिन इसे बीमारी कहना ठीक नहीं है. वादी पक्ष के वकील ने उनके पुराने इंटरव्यू का हवाला देते हुए सवाल उठाए. इस पर मोसेरी ने कहा कि पहले उन्होंने यह शब्द सामान्य बातचीत में इस्तेमाल किया था, लेकिन अब वह ज्यादा सावधानी बरतते हैं.

    सुनवाई में इंस्टाग्राम के ब्यूटी फिल्टर्स पर भी सवाल उठे. आरोप है कि ये फिल्टर्स चेहरा इस तरह बदलते हैं कि युवाओं में अपने शरीर को लेकर असंतोष बढ़ सकता है और प्लास्टिक सर्जरी जैसी चीजों का दबाव बन सकता है. जनवरी 2025 में Meta ने थर्ड-पार्टी एआर फिल्टर्स बंद कर दिए थे. अदालत में मौजूद कुछ अभिभावक इस मुद्दे पर भावुक भी हो गए, जिसके बाद जज को उन्हें शांत रहने की हिदायत देनी पड़ी.

    Meta का कहना है कि उसने किशोरों की सुरक्षा के लिए कई नए फीचर जोड़े हैं. लेकिन आलोचकों का दावा है कि रिसर्च में बने टीन अकाउंट्स को अब भी अनुचित यौन सामग्री और आत्म-हानि से जुड़ा कंटेंट सुझाया गया. कंपनी ने इन आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है.

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