
नई दिल्ली: देशभर में कई ऐसे टोल (Toll) मौजूद हैं, जहां लागत वसूली (Cost Recovery) के बाद भी धड़ल्ले से टोल टैक्स (Tax) की वसूली की जा रही है. इसके साथ ही न तो मरम्मत का काम किया जा रहा है और न ही सही सड़क (Road) लोगों को मिल पा रही है. इस तरह की टोल वसूली पर संसदीय समिति (Parliamentary Committee) ने चिंता जताई है. संसदीय समिति ने परियोजना लागत की वसूली के बाद भी “निरंतर टोल” वसूली और 3% की वार्षिक वृद्धि पर सवाल उठाए हैं.
नेशनल हाईवे पर टोल की भारी वृद्धि की जांच कर रही एक संसदीय समिति ने परियोजना लागत वसूल होने और राजमार्ग की गुणवत्ता जताई है. समिति ने इसको लेकर सुझाव दिया कि टोल निर्धारित किए जाने चाहिए. इसके साथ ही टैरिफ प्राधिकरण की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा है.
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल की अध्यक्षता वाली लोक लेखा समिति ने कहा, “इस बिंदु से आगे टोल जारी रखने की अनुमति तभी दी जानी चाहिए जब प्रस्तावित स्वतंत्र निरीक्षण प्राधिकरण की तरफ से स्पष्ट रूप से उचित और अनुमोदित हो.”
समिति ने कहा कि सड़क परिवहन मंत्रालय नागरिक उड्डयन क्षेत्र में हवाई अड्डा आर्थिक नियामक प्राधिकरण (एईआरए) की तर्ज पर टोल निर्धारण, संग्रह और विनियमन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक प्राधिकरण स्थापित कर सकता है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि प्राधिकरण को कुछ मानदंडों के आधार पर टोल संशोधनों की आवधिकता की समीक्षा और निर्धारण करने का अधिकार दिया जाना चाहिए.
रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने पीएसी को बताया कि उसने नीति आयोग से आईआईटी और आईआईएम के साथ मिलकर एक रिसर्च करने की रिक्वेस्ट की है. पैनल ने आम जनता के हितों का ध्यान रखने की बात कही है. इसमें समिति की तरफ से कहा गया है कि जब तक योजना का पैसा वसूल नहीं होता तब तक टोल टैक्स की ऊंची कीमतें ठीक हैं. हालांकि परियोजना के पैसों की वसूली के बाद ऊंचे टोल टैक्स गलत हैं. उनकी समीक्षा होनी चाहिए.
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