
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency- NIA) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के अनंतनाग जिले (Anantnag district) में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में छापेमारी की है। यह कार्रवाई ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी है, जिसमें शिक्षित और प्रतिष्ठित पेशेवर शामिल हैं—जैसे डॉक्टर, तकनीशियन और अन्य लोग—जो पारंपरिक आतंकवादी प्रोफाइल से अलग हैं। एनआईए की टीम ने कॉलेज परिसर में तलाशी ली और खास तौर पर एक डॉक्टर के लॉकर से राइफल बरामद होने के संबंध में साक्ष्य जुटाए।
यह मॉड्यूल ‘व्हाइट कॉलर’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें आम आतंकवादियों के बजाय समाज के सम्मानित वर्ग के लोग शामिल थे। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने दस्तावेजों और अन्य सबूतों की खोज की, ताकि इस नेटवर्क के गहरे संबंधों और संरचना का पता लगाया जा सके।
जांच की शुरुआत और लाल किले विस्फोट
इस जांच की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई, जब दिल्ली के लाल किले के पास एक कार बम विस्फोट हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत हुई। इस हमले के बाद ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ, जिसमें डॉक्टरों का एक समूह शामिल था। इस मामले में प्रमुख आरोपी डॉ. आदिल अहमद रदर है, जो पहले GMC अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रह चुका था। उसकी गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हुई, जहां वह एक निजी अस्पताल में काम कर रहा था।
डॉ. रदर के लॉकर से AK-56 राइफल और गोला-बारूद बरामद हुआ, जिसके बाद मामला एनआईए को सौंप दिया गया। अब तक इस मॉड्यूल से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और फरीदाबाद से बड़ी मात्रा में विस्फोटक जब्त किए गए हैं।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
जांच में यह भी पता चला कि डॉ. आदिल अहमद रदर कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपोरा का रहने वाला है और उसने श्रीनगर के GMC से MBBS की डिग्री हासिल की थी। एनआईए के दावे के मुताबिक, वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा था और दिल्ली में हुए विस्फोट में उसकी भूमिका थी।
मॉड्यूल में अन्य डॉक्टर भी शामिल थे, जिनमें डॉ. मुजामिल अहमद गनाई और डॉ. शाहीन सईद का नाम सामने आया है। एनआईए ने बताया कि यह समूह पिछले चार वर्षों से सक्रिय था और वैश्विक कॉफी चेन जैसी जगहों पर हमले की साजिश रच रहा था। उनका लक्ष्य इजराइल-गाजा संघर्ष से प्रेरित होकर ऐसे हमले करना था। कुछ सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की भी योजना बनाई थी।
आतंकवाद का नया चेहरा
यह मामला आतंकवाद के एक नए रूप को दर्शाता है, जहां समाज के प्रतिष्ठित पेशेवर कट्टरपंथी विचारधारा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और अपनी शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति का गलत उपयोग कर रहे हैं। एनआईए की यह छापेमारी मॉड्यूल के बचे हुए सदस्यों और उनके नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जांच अभी जारी है और भविष्य में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह के मॉड्यूल समाज के लिए अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि ये सामान्य जीवन में घुलमिलकर काम करते हैं और अपनी पहचान छुपाते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तेज कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करती है।
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