
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru University- JNU) एक बार फिर अपने नारों और विरोध प्रदर्शनों की वजह से चर्चा के केंद्र में है। बुधवार को कैंपस के भीतर उस समय माहौल गरमा गया जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (All India Students’ Council- ABVP) के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के खिलाफ हुई विवादास्पद नारेबाजी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। एबीवीपी ने इस दौरान न केवल नारेबाजी का कड़ा विरोध किया, बल्कि कथित ‘राष्ट्रविरोधी तत्वों’ का पुतला फूंककर अपना आक्रोश भी जाहिर किया।
‘बेलगाम घोड़े’ की तरह व्यवहार कर रहा है वामपंथी ईकोसिस्टम: मनीष चौधरी
प्रदर्शन के दौरान अपनी बात रखते हुए एबीवीपी के उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने तीखे हमले किए। उन्होंने हालिया नारेबाजी को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि कुछ तत्व ‘बेलगाम घोड़े’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं और बार-बार मर्यादाओं को लांघ रहे हैं। मनीष ने सवाल उठाया, “जब ये लोग ‘कब्र खोदने’ की बात करते हैं, तो क्या इनका मतलब उस जनादेश की कब्र खोदने से है जो देश की जनता ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को दिया है? या फिर ये किसी बड़े नरसंहार की बात कर रहे हैं?” उन्होंने आगे कहा कि वामपंथी ईकोसिस्टम की बुनियादी संरचना ही हिंसा पर टिकी है और जेएनयू में उनके प्रतिनिधि इसी हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।
तियानमेन स्क्वायर और बांग्लादेश का जिक्र
एबीवीपी जेएनयू के सचिव प्रवीण पीयूष ने इस प्रदर्शन के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए इसे ‘अराजकता के खिलाफ लड़ाई’ करार दिया। पुतला दहन के दौरान उन्होंने विपक्षी विचारधारा पर प्रहार करते हुए अंतरराष्ट्रीय संदर्भों का जिक्र किया।
प्रवीण पीयूष ने तल्ख लहजे में पूछा, “क्या ये लोग भारत में भी वैसी ही सामूहिक हत्याएं करना चाहते हैं जैसी इनके पूर्वजों ने चीन के तियानमेन स्क्वायर या रूस में की थीं? क्या ये वही रक्तपात दोहराना चाहते हैं जो फिलहाल बांग्लादेश में दिख रहा है?” उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जेएनयू को किसी की ‘राजनैतिक प्रयोगशाला’ नहीं बनने दिया जाएगा।
‘शिक्षा का मंदिर है जेएनयू, राजनीति का अखाड़ा नहीं’
एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका यह विरोध प्रदर्शन कैंपस की गरिमा को बचाने के लिए है। संगठन का मानना है कि मुट्ठी भर लोग पूरे विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल कर रहे हैं। पीयूष ने कहा, “हम यह संदेश देना चाहते हैं कि जेएनयू शिक्षा का मंदिर है। यहां पढ़ाई होनी चाहिए, देश के खिलाफ साजिशें नहीं।”
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