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इजरायल में बढ़ते अपराध के खिलाफ संयुक्त प्रदर्शन: अरब और यहूदी नागरिक एक साथ सड़कों पर उतरे

February 11, 2026

तेल अवीव। इजरायल में अरब समुदायों (Arab communities in Israel) में बढ़ती हिंसक घटनाओं और हत्याओं के विरोध में 10 फरवरी को देशभर में “नेशनल डे ऑफ डिसरप्शन” (National Day of Disruption) के तहत व्यापक प्रदर्शन किए गए। इस दौरान अरब और यहूदी नागरिकों (Arab and Jewish citizens) ने संयुक्त रूप से सड़कों पर उतरकर सरकार से अपराध पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

देश के कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन
प्रदर्शन की शुरुआत जाफा के क्लॉक स्क्वायर से हुई और इसके बाद यरूशलम, बीर-शेवा, लोद, तामरा और जिस्र-अल-जरका सहित कई शहरों में रैलियां और मार्च आयोजित किए गए। हाइफा में भी बड़ी सभा हुई, जहां प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई।

संगठित अपराध और अवैध हथियारों पर कार्रवाई की मांग
यह अभियान हत्या पीड़ितों के परिवारों, नागरिक संगठनों और ‘स्टैंडिंग टुगेदर’ आंदोलन के सहयोग से आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अरब बहुल इलाकों में संगठित अपराध, अवैध हथियारों का प्रसार और सुरक्षा की कमी गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं।

आयोजकों के मुताबिक, वर्ष की शुरुआत से अब तक अरब कस्बों में आपराधिक हिंसा में 38 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि वर्ष 2025 में इस तरह की घटनाओं में रिकॉर्ड 252 हत्याएं दर्ज की गई थीं।



  • यातायात अवरुद्ध, कई स्थानों पर हिरासत
    तेल अवीव में प्रदर्शनकारियों ने अयालोन राजमार्ग की दक्षिणी लेन को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया, जिससे लगभग आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।

    कुछ स्थानों पर प्रतीकात्मक विरोध के तहत सार्वजनिक फव्वारों में लाल रंग डाले जाने की घटनाएं भी सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया।
    यरूशलम में मुख्य सड़क अवरुद्ध करने पर पुलिस कार्रवाई में कई गिरफ्तारियां हुईं।

    नेतृत्व पर उठे सवाल
    पूर्व सांसद और उच्च अरब निगरानी समिति के अध्यक्ष जमाल जाहल्का ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन अरब नागरिकों की रोजमर्रा की असुरक्षा को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से अपराध रोकने के लिए ठोस कदम उठाने और सुरक्षा नीति की समीक्षा की मांग की।

    सरकार पर उपेक्षा के आरोप
    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से अरब समुदायों में बढ़ते अपराध, हथियारों की तस्करी और संगठित आपराधिक नेटवर्क पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं किया गया। इसी मुद्दे को लेकर सरकार की नीतियों की जांच की मांग भी उठाई जा रही है।

    विश्लेषकों के अनुसार, यह विरोध केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और समान नागरिक अधिकारों से जुड़ी व्यापक चिंता का संकेत भी माना जा रहा है।

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