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स्टारलिंक विवाद में कमल हासन की एंट्री, मस्क को सुनाई खरी-खरी, कंगना रनौत बोलीं- तीखा और सटीक जवाब

October 10, 2026
नई दिल्ली । भारत में स्टारलिंक (Starlink)की लॉन्चिंग (launch)और लाइसेंसिंग प्रक्रिया (Licensing Process)को लेकर छिड़ी बहस अब राजनीतिक और मनोरंजन जगत तक पहुंच गई है। दुनिया के चर्चित (Billionaire Elon Musk)अरबपति एलन मस्क की ओर से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा (Satellite internet service)को मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए जाने के बाद अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने उन्हें दोटूक जवाब दिया है। हासन ने भारत की नियामक स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए साफ कहा कि किसी भी देश की नीतियां किसी अरबपति के दबाव में तय नहीं होनी चाहिए। उनकी इस टिप्पणी को अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत का भी समर्थन मिला है। कंगना ने हासन की बातों की तारीफ करते हुए उनके जवाब को तीखा सटीक और व्यंग्यात्मक बताया।
कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कमल हासन की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि यह बात चुभने वाली है और किसी भी अरबपति को भारत या अमेरिका जैसे देशों की नीतियां तय नहीं करनी चाहिए। कंगना ने हासन की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बात बेहद प्रभावशाली तरीके से रखी है। इस प्रतिक्रिया के बाद स्टारलिंक लाइसेंसिंग विवाद में कंगना की एंट्री ने चर्चा को और तेज कर दिया है। आमतौर पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वाली कंगना ने इस बार भारत के नीतिगत अधिकारों के समर्थन में कमल हासन का साथ दिया है।
कमल हासन ने अपने बयान में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वायत्तता पर जोर दिया। उन्होंने एलन मस्क को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी अरबपति को किसी देश की नीति तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए फिर चाहे वह भारत हो या अमेरिका। हासन के मुताबिक भारत एक लोकतंत्र है और कोई कॉलोनी नहीं है। देश अपने भविष्य से जुड़े फैसले खुद लेने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के लिए अपने दरवाजे खुले रखता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विदेशी कारोबारी हित या दूसरे देशों के दोहरे मापदंड भारत की नीतियों को प्रभावित करें।
हासन ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के मामले में प्रतिस्पर्धा और किफायती कनेक्टिविटी की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। भारत जैसे बड़े देश में दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना महत्वपूर्ण है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाओं का विस्तार सीमित है। ऐसे में नई तकनीक और कंपनियां लोगों के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं। हालांकि इसके लिए निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना भी जरूरी है।
दरअसल एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रही है। मस्क ने लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे और दूसरे देशों में सेवा को मिली मंजूरी का हवाला दिया था। भारत में किसी भी दूरसंचार सेवा को शुरू करने के लिए संबंधित नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। स्टारलिंक लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद उपग्रहों के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है और इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक भी इंटरनेट पहुंचाना है जहां सामान्य नेटवर्क का विस्तार मुश्किल है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर तकनीकी निवेश विदेशी कंपनियों की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की नीतिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को सामने ला दिया है। कमल हासन के बयान और कंगना रनौत के समर्थन के बाद यह मुद्दा केवल इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं रहा बल्कि इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि वैश्विक कंपनियों के लिए बाजार खोलते समय राष्ट्रीय हितों की रक्षा कैसे की जाए।

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