वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) के बीच लंबे समय से जारी तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों (American battleships) को निशाना बनाया जा सकता है।
खामेनेई ने एक सार्वजनिक भाषण में कहा कि अमेरिका ने ईरान के आसपास सैन्य जहाज़ भेजे हैं, लेकिन “युद्धपोत खतरनाक हथियार है, उससे ज्यादा खतरनाक वह शक्ति है जो उसे डुबो सकती है।” उनके इस बयान को क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच सीधी चेतावनी माना जा रहा है।
दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद पर स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अप्रत्यक्ष बातचीत शुरू हुई है। सूत्रों के मुताबिक यह वार्ता मध्यस्थ देश ओमान की भूमिका में हो रही है। बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराकची हिस्सा ले रहे हैं।
इजरायल के साथ कार्रवाई का भी जिक्र
तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों में इजरायल का साथ दिया था। इसके बाद वॉशिंगटन ने मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैन्य बल और युद्धक क्षमता तैनात कर दी।
ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान में “शासन परिवर्तन” सबसे बेहतर समाधान हो सकता है—जिस पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास
ईरान ने जवाबी शक्ति प्रदर्शन करते हुए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास किया। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस इलाके में किसी भी टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।
“जबरदस्ती सत्ता परिवर्तन संभव नहीं”
खामेनेई ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरान की सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऐसी कोई भी रणनीति सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना भी जवाबी प्रहार से अछूती नहीं रह सकती।
प्रतिबंध और शर्तें—वार्ता की असली चुनौती
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जिनेवा वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका कितनी गंभीरता से आर्थिक प्रतिबंध हटाने को तैयार है और क्या वह “अवास्तविक मांगों” से पीछे हटता है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देश फिलहाल “दबाव और बातचीत” की समानांतर रणनीति अपना रहे हैं—एक तरफ सैन्य ताकत का प्रदर्शन, दूसरी तरफ परमाणु समझौते की कोशिश।
मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य हलचल और तीखी बयानबाज़ी संकेत दे रही है कि कूटनीतिक वार्ता के बावजूद अविश्वास गहरा है। आने वाले समय में यह तय होगा कि जिनेवा की बातचीत तनाव कम करती है या खाड़ी क्षेत्र एक नए टकराव की ओर बढ़ता है।
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