नई दिल्ली। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में नींद (Sleep) की समस्या आम होती जा रही है। काम का दबाव, मानसिक तनाव, मोबाइल-लैपटॉप (Mental stress, mobile-laptop) का अधिक इस्तेमाल और असंतुलित दिनचर्या के कारण कई लोग अनिद्रा (इंसोम्निया) से जूझ रहे हैं। जब समस्या बढ़ती है तो कुछ लोग राहत के लिए नींद की गोलियों का सहारा लेने लगते हैं। शुरुआत में ये दवाएं असर दिखाती हैं, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल से इनकी लत लग सकती है।
लेकिन जब इन दवाओं के जरिए GABA का असर बार-बार कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता है, तो दिमाग धीरे-धीरे इन पर निर्भर होने लगता है। इससे प्राकृतिक रूप से नींद आने की क्षमता कम हो सकती है।
2. टॉलरेंस और डिपेंडेंस क्या है?
नींद की गोलियों की लत को दो चरणों में समझा जा सकता है:
(1) टॉलरेंस (Tolerance)
समय के साथ पहले वाली डोज का असर कम होने लगता है। वही नींद पाने के लिए अधिक मात्रा की जरूरत पड़ती है।
(2) डिपेंडेंस (Dependence)
अगर दवा अचानक बंद कर दी जाए तो अनिद्रा, घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, पसीना या कंपकंपी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। यही शारीरिक और मानसिक निर्भरता की शुरुआत है।
3. रिवॉर्ड सिस्टम पर असर
कुछ दवाएं जैसे Alprazolam (जो एंजायटी और अनिद्रा दोनों में दी जाती है) दिमाग के “रिवॉर्ड सिस्टम” को भी प्रभावित कर सकती हैं।
जब व्यक्ति दवा लेने के बाद राहत और आराम महसूस करता है, तो दिमाग उस अनुभव को सकारात्मक रूप से याद रखता है। आगे चलकर हल्के तनाव या मामूली नींद की समस्या में भी व्यक्ति दवा लेने की आदत विकसित कर सकता है। इसे मनोवैज्ञानिक लत कहा जाता है।
4. क्या सभी नींद की दवाएं लत लगाती हैं?
सभी दवाओं में लत का जोखिम समान नहीं होता।
उदाहरण के लिए Melatonin आधारित सप्लीमेंट्स अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले माने जाते हैं, क्योंकि वे शरीर में स्वाभाविक रूप से बनने वाले हार्मोन की नकल करते हैं। हालांकि, इन्हें भी लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय सलाह के लेना सही नहीं है।
5. विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार:
स्लीपिंग पिल्स का उपयोग कम अवधि के लिए ही सुरक्षित माना जाता है।
डॉक्टर की निगरानी में ही दवा लेनी चाहिए।
अचानक दवा बंद करने के बजाय धीरे-धीरे कम करना बेहतर होता है।
बेहतर नींद के लिए क्या करें?
सोने और जागने का समय तय रखें
सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें
कैफीन और भारी भोजन से बचें
नियमित व्यायाम करें
जरूरत हो तो “कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी फॉर इंसोम्निया (CBT-I)” जैसी थेरेपी अपनाएं
नींद की गोलियां तुरंत राहत जरूर देती हैं, लेकिन इनका लंबे समय तक और बिना सलाह उपयोग निर्भरता का कारण बन सकता है। इसलिए अनिद्रा की समस्या होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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