
नई दिल्ली। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल ने एक बार फिर वैश्विक उद्योग जगत का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रविवार को मलेशिया के टॉप उद्योगपतियों की मुलाकात ने भारत-मलेशिया आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के संकेत दिए हैं। इस उच्चस्तरीय बातचीत में भारत में बड़े पैमाने पर निवेश, ऊर्जा साझेदारी और भविष्य की तकनीकों में सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई, जिससे आने वाले समय में अरबों डॉलर के निवेश की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया की प्रमुख कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत किया। इनमें पेट्रोनास के अध्यक्ष एवं समूह सीईओ तेंगकू मुहम्मद तौफिक, बर्जया कॉर्पोरेशन बरहाद के संस्थापक विंसेंट टैन ची यिउन, खजाना नेशनल बरहाद के प्रबंध निदेशक अमीरुल फैसल वान जाहिर और फाइसन इलेक्ट्रॉनिक्स के फाउंडर पुआ खिन सेंग शामिल रहे। इस दौरान भारत में निवेश के मौजूदा अवसरों और लॉन्ग टर्म पार्टनरशिप पर विचार-विमर्श हुआ।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पेट्रोनास के साथ ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। खासतौर पर रिन्यूएबल एनर्जी, स्वच्छ ईंधन, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया जैसे उभरते सेक्टर्स में नए अवसरों पर चर्चा हुई। उल्लेखनीय है कि पेट्रोनास पिछले तीन दशकों से भारत में सक्रिय है और एलएनजी, पेट्रोकेमिकल्स तथा हरित ऊर्जा समाधानों में मजबूत उपस्थिति रखती है।
पीएम मोदी ने हाल के वर्षों में किए गए आर्थिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने स्थिर, पारदर्शी और पूर्वानुमानित नीति वातावरण की बात दोहराई, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने मलेशियाई कंपनियों को बुनियादी ढांचा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
मुलाकात के दौरान मलेशियाई उद्योगपतियों ने भारत सरकार द्वारा किए गए सुधारों की सराहना की और भारत की विकास यात्रा पर मजबूत विश्वास जताया। उन्होंने भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने, निवेश पोर्टफोलियो बढ़ाने और भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम की संभावनाएं तलाशने की इच्छा व्यक्त की। यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को मजबूती देने वाली मानी जा रही है, बल्कि भारत को वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में भी अहम कदम है। संकेत साफ हैं कि आने वाले समय में मलेशिया से भारत में बड़े निवेश देखने को मिल सकते हैं, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होंगे।
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