
इंदौर। गांधी नगर से लेकर खजराना चौराहे तक मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर का काम तो चल ही रहा है, दूसरी तरफ अंडरग्राउंड का जो रूट अब खजराना से पलासिया, एमजी रोड, राजबाड़ा, बड़ा गणपति से लेकर एयरपोर्ट तक किया गया है, उसका भी सर्वे शुरू हो गया है। हालांकि एमजी रोड से एयरपोर्ट तक का अंडरग्राउंड का ठेका 2200 करोड़ रुपए में मेट्रो कॉर्पोरेशन दे चुका है, जिसके चलते रीगल चौराहा, बड़ा गणपति और एयरपोर्ट की तरफ स्टेशन बनाने के साथ ही अंडरग्राउंड रुट की तैयारी भी चल रही है। हालांकि अभी तक बदलाव को लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव नहीं रखा गया है।
एलिवेटेड के 17 किलोमीटर के हिस्से में मेट्रो के यात्री संचालन की तैयारी भी इन दिनों जोर-शोर से चल रही है और अगले तीन से चार महीने में इस हिस्से में मेट्रो दौडऩे लगेगी, जिसके कई सफल ट्रायल भी लिए जा चुके हैं और दिल्ली से सेफ्टी के मापदण्डों को जांचने के लिए टीम भी आएगी और उसके प्रमाण-पत्र के बाद ही यात्री संचालन शुरू किया जा सकेगा। अभी गांधी नगर से लेकर टीसीएस चौराहा तक 6 किलोमीटर के हिस्से में यात्री संचालन शुरू भी किया, मगर फिलहाल यात्रियों का ही टोटा है औ अभी बीच में कॉरिडोर का काम पूरा करने के लिए मेगा ब्लॉक की घोषणा भी मेट्रो कॉर्पोरेशन ने की थी, ताकि टीसीएस चौराहा से लेकर रेडिसन चौराहा तक के सभी 16 स्टेशनों का काम पूरा किया जा सके। अभी खजराना चौराहा तक चूंकि एलिवेटेड कॉरिडोर ही बनना है, लिहाजा उसके काम में भी गति है।
मगर उसके बाद जो अंडरग्राउंड रुट तैयार होना है उसमें अवश्य अभी समय लगेगा, क्योंकि रोबोट चौराहा से लेकर पलासिया, एमजी रोड तक पूर्व में एलिवेटेड कॉरिडोर मंजूर था और उसी के मुताबिक टेंडर स्वीकार किया जा चुका है और अब चूंकि खजराना चौराहा तक ही एलिवेटेड बनवाया जा रहा है, इसलिए ठेकेदार कम्पनी का आगे के कार्य का टेंडर रद्द करना पड़ेगा और इसके एवज में भारी-भरकम मुआवजा राशि भी चुकानी होगी। दूसरी तरफ इस हिस्से में अंडरग्राउंड रूट का नए सिरे से सर्वे होगा और उसकी कॉस्टिंग भी निकाली जाएगी। अभी तो 800 करोड़ रुपए की राशि अतिरिक्त राशि खर्च होना का अनुमान लगाया गया है। मगर जानकारों का कहना है कि जब वास्तविक सर्वे की रिपोर्ट सामने आएगी और टेंडर होगा, तब पता चलेगा कि वास्तव में कितनी कॉस्ट बढ़ी है और एक अनुमान है कि यह कॉस्ट 1500 करोड़ रुपए पार भी हो सकती है।
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने अंडरग्राउंड रुट चेंज करने की घोषणा तो कर दी, मगर अभी तक इस आशय का प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं रखा गया है, क्योंकि पहले कैबिनेट से ही बढ़ी हुई लागत और रूट बदलने और नए सिरे से सर्वे करने की मंजूरी होगी और उसके बाद फिर उसे केन्द्र सरकार को भेजना होगा। साथ ही एडीबी से भी मंजूरी लेना होगी, क्योंकि इंदौर-भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट को एडीबी से ही लोन मिला है। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा। वैसे भी डेढ़ साल से अंडरग्राउंड का काम ठप ही पड़ा रहा।
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