ढाका। बांग्लादेश में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने और सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ होने के बाद अंतरिम प्रशासन के प्रमुख मोहम्मद यूनुस (Mohammad Yunus) पद छोड़ने की तैयारी में हैं। चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की जीत और तारिक रहमान के उभरने के साथ ही देश में नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
यूनुस प्रशासन का कहना था कि केवल चुनाव कराना ही लक्ष्य नहीं, बल्कि चुनाव के बाद देश को स्थिर और लोकतांत्रिक दिशा देना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने एक व्यापक ‘सुधार चार्टर’ तैयार किया, जिसे वे अपने कार्यकाल की सबसे अहम विरासत के रूप में छोड़ना चाहते हैं।
शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग के पतन के बाद यूनुस को संक्रमणकालीन नेतृत्व सौंपा गया था। उन्होंने खुद कहा था कि उन्हें “एक लगभग टूटी हुई व्यवस्था” विरासत में मिली, जिसे फिर से संस्थागत रूप देना उनकी प्राथमिकता रही।
अगस्त 2024 के उथल-पुथल भरे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद लौटे यूनुस ने प्रशासनिक ढांचे को दुरुस्त करने, चुनावी प्रक्रिया बहाल करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास लौटाने की कोशिश की।
माइक्रोक्रेडिट से राजनीति तक का सफर
डॉ. यूनुस को दुनिया भर में गरीबों के लिए लघु ऋण (माइक्रोक्रेडिट) मॉडल शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। इसी सोच से उन्होंने ग्रामीण बैंक की स्थापना की, जिसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। केयरटेकर नेतृत्व संभालते समय उनका जोर आर्थिक समावेशन और प्रशासनिक सुधारों पर रहा।
चुनाव के बाद भी सक्रिय रह सकते हैं यूनुस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पद छोड़ने के बाद भी यूनुस प्रत्यक्ष राजनीति से दूर रहकर संस्थागत सुधार, सामाजिक उद्यम और आर्थिक पुनर्निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों में भूमिका निभा सकते हैं।
उनका हालिया संदेश भी इसी दिशा में था, जिसमें उन्होंने जनमत समर्थन के जरिए “नए बांग्लादेश” के निर्माण की बात कही।
राजनीतिक माहौल अब भी संवेदनशील
चुनावी जीत के बाद BNP के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ है, जबकि जमात-ए-इस्लामी ने भी चुनाव में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
दूसरी ओर, अवामी लीग ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण बना हुआ है।
शेख हसीना फिलहाल भारत में निर्वासन में हैं, और उनके समर्थक मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को चुनौती दे रहे हैं। इस बीच देश में सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक हिंसा की घटनाएं भी चिंता बढ़ा रही हैं।
आगे की राह: सुधार बनाम सियासत
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश अब ऐसे मोड़ पर है जहां नई सरकार को राजनीतिक वैधता के साथ-साथ प्रशासनिक और सामाजिक सुधारों को लागू करने की चुनौती होगी—और यही वह क्षेत्र है जहां यूनुस की सोच भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
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